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टीम इंडिया की नजर रिकॉर्ड नौंवी जीत पर

सीरीज पर पहले ही कब्जा जमा चुकी टीम इंडिया चौथे वनडे क्रिकेट मैच में भी श्रीलंका पर फतह कर लगातार नौंवी जीत का भारतीय रिकॉर्ड बनाने उतरेगी। भारत ने मंगलवार को तीसरे वनडे में श्रीलंका को 147 रनों से रौंद लगातार आठवीं जीत दर्ज की थी। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में इन जीतों ने उन्हें पूर्व कप्तानों सुनील गावस्कर, सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ की बराबरी पर ला खडा किया है। अब गुरुवार को चौथा वनडे जीतकर धोनी लगातार नौ मैचों में भारत को विजयी बनाने वाले कप्तान बन सकते हैं। वैसे भी सारी स्थितियां भाग्य के धनी धोनी के पक्ष में हैं। भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही बेहतरीन लय में चल रही है। हालांकि मास्टर ब्लास्टर सचिन अब तक गलत अंपायरिंग के शिकार होकर जल्द ही पैवेलियन लौट गए हैं लेकिन श्रीलंका के लिए यह बड़ी चिंता की भी बात है। सचिन को अधिक देर तक चुप रखना मुश्किल है, इस मैच में वह रही-सही कसर निकाल सकते हैं। बाकी बल्लेबाज भी सीरीज में कुछ अहम पारियों से अपनी बेहतरीन फार्म का सबूत दे चुके हैं। विस्फोटक वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर अपनी आदत के अनुरूप तेज खेलने में यकीन रखते हैं। सहवाग ने पिछले मैच में आक्रामक युवराज सिंह के साथ मिलकर जिस तरह से श्रीलंकाई गेंदबाजी का कत्लेआम मचाया, वह किसी भी खेल संग्रहालय का हिस्सा हो सकता है। सुरेश रैना और धोनी भी बढ़िया लय में दिख रहे हैं। कप्तान धोनी तो मैच फिनिशर की भूमिका में पूरी तरह रम चुके हैं और यूसुफ पठान भी अपनी ताबड़तोड़ पारियों से टीम की पूरी सेवा कर रहे हैं। भारत का गेंदबाजी विभाग भी बेहद संतुलित नजर आ रहा है। जहीर खान, इशांत शर्मा और प्रवीण कुमार की पेस तिकड़ी के साथ स्पिनर प्रज्ञान ओझा भी श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार कहर ढा रहे हैं। लेकिन सीरीज अपने कब्जे में होने के बाद भारत कुछ ऐसे खिलाड़ियों को आजमा सकता है जिन्हें अब तक खेलने का मौका नहीं मिल पाया है। ऐसे खिलाडियों में रोहित शर्मा, इरफान पठान, लक्ष्मीपति बालाजी और युवा हरफनमौला रवींद्र जडेजा शामिल हैं। दूसरी तरफ श्रीलंका के लिए इस समय कुछ भी ठीक नहीं है। न तो बल्लेबाजी क्िलक कर पा रही है और न उसके गेंदबाज ही विपक्षी टीम पर अंकुश लगा पा रहे हैं। फील्डिंग का स्तर भी काफी गिरा है। बहरहाल श्रीलंका को अपनी जमीन पर सीरीज 0-5 से हारने की शर्मनाक स्थिति से बचने के लिए इस मैच में वापसी करनी ही होगी। बल्लेबाजी में सनत जयसूर्या, तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगकारा और तिलन कंदाम्बी से उसे बड़ी पारियों की उम्मीद होगी जबकि गेंदबाजी में मुथैया मुरलीधरन और अजंता मेंडिस की स्पिन जोड़ी को क्िलक करना होगा। मुरली और मेंडिस की जोड़ी ने गत छह महीनों में श्रीलंका को कई मैचों में जीत दिलाई है लेकिन भारतीय बल्लेबाजों पर दोनों ही स्पिनर कोई खास असर नहीं डाल पाए हैं। श्रीलंका की नाकामी की यह भी एक बड़ी वजह है और अगर यह सिलसिला न रुका तो मेजबानों की स्थिति और खराब हो सकती है। उधर, छह महीने पहले की बात है श्रीलंका के ‘अबूझ’ स्निपर अजंता मेंडिस का जादू भारतीय बललेबाजों के सिर चढ॥कर बोल रहा था। लेकिन अब लगता है कि भारतीय बल्लेबाजों ने मेंडिस का ‘डंक’ तोड़ दिया है। मेंडिस ने भारत के खिलाफ मंगलवार को तीसरे वनडे मैच में नौ ओवर में 64 रन देकर एक विकेट लिया। जो उनके 27 वनडे के अब तक के करियर में सबसे महंगी गेंदबाजी है। यह पहला मौका है जब 23 वर्षीय इस गेंदबाज ने किसी वनडे में 60 से ज्यादा रन दिए हैं। मेंडिस की इससे पहले सबसे महंगी गेंदबाजी भी भारत के खिलाफ थी। उन्होंने गत वर्ष 24 अगस्त को कोलंबो में भारत के खिलाफ तीसरे वनडे में 10 ओवर में 56 रन देकर तीन विकेट लिए थे। वनडे क्रिकेट में सबसे तेजी से 50 विकेट पूरे करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके मेंडिस गत वर्ष कराची में हुए एशिया कप और फिर भारत के खिलाफ घरेलू टेस्ट तथा वनडे सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द साबित हुए थे। एशिया कप के फाइनल में उन्होंने आठ ओवरों में मात्र 13 रन पर छह विकेट लेकर भारत को शर्मनाक हार झेलने के लिए मजबूर किया था। भारत ने उस दौरे में हालांकि वनडे सीरीज 3-2 से जीती थी। लेकिन उस सीरीज में मेंडिस ने 13 विकेट लिए थे। मौजूदा सीरीज में आश्चर्यजनक रूप से भारतीय बल्लेबाज मेंडिस और उनके अनुभवी जोड़ीदार मुथैया मुरलीधरन पर इस कदर हावी हो गए हैं कि इन दोनों दिग्गज स्पिनरों को कुछ कर दिखाने का मौका नहीं मिल पाया है और भारत सीरीज में 3-0 की अपराजेय बढ़त बना चुका है। पिछली सीरीज में मेंडिस ने सभी भारतीय बल्लेबाजों खासकर युवराज सिंह को बेहद परेशान किया था। उस सीरीज में युवराज को मेंडिस की गेंदे बिल्कुल समझ नहीं आयी थीं। लेकिन तीसरे वनडे में युवराज और ओपनर वीरेन्द्र सहवाग ने आतिशी शतक ठोकते हुए मेंडिस तथा मुरली की गेंदों की जमकर धुनाई की। मेंडिस ने नौ ओवर में 64 रन और मुरली ने 10 ओवर में 60 रन लुटाए। इससे पूर्व सीरीज के पहले दो वनडे में भी मेंडिस का प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा था। दाम्बुला में पहले वडे में मेंडिस 47 रन देकर कोई विकेट नहीं ले पाए थे जबकि कोलंबो में दूसरे वनडे में उन्हें 44 रन पर दो विकेट लिए थे। मेंडिस अब तक 27 वनडे में 12.85 के बेहद प्रभावशाली औसत से 62 विकेट ले चुके हैं। लेकिन मौजूदा सीरीज में वह तीन मैचों में 51.66 के महंगे औसत से तीन विकेट ही ले पाए हैं। इस तथ्य से पता चलता है कि भारतीय बल्लेबाजों पर छाया मेंडिस का जादू टूट चुका है। मेंडिस ही नहीं इस सीरीज में विश्व विख्यात ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का भी बुरा हाल है। मुरली तीन मैचों में 72.00 के बेहद मंहगे औसत से सिर्फ दो विकेट ही ले पाए हैं। मुरली को यह सीरीज शुरू होने से पहले पाकिस्तान के वसीम अकरम का 502 विकेट का वनडे विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के लिए सिर्फ तीन विकेट की जरूरत थी। लेकिन वह तीन मैचों में दो विकेट लेकर अकरम की बराबरी पर ही पहुंच पाए हैं। मेंडिस और मुरली की विफलता ही इस समय श्रीलंका के यह सीरीज हारने का प्रमुख कारण है।

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