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ग्रामीण वोटरों में नहीं दिखा उत्साह

‘पहले रोी है तब रोा है’। बख्तियारपुर के कारू ने जब यह बात कही तो साफ हो गया मतदान के दिन भी बाजारों के गुलजार रहने का मामला। सरकारी भवनों पर मतदान सामग्री के साथ बैठे कर्मचारियों पर किसी की नजर नहीं पड़े तो उसके लिए यह कहना कठिन था कि गुरुवार का दिन लोकतंत्र के महापर्व का आखिरी दिन है। राजधानी से बाहर निकलते ही बख्तियारपुर तक अधिसंख्य बूथ वीरान पड़े थे और बाजार गुलजार। इक्का-दुक्का बूथों की बात छोड़ दें तो कहीं लंबी कतार नहीं। जो जब आया वोट देकर चला गया। हालांकि सुबह में वोटरों में उत्साह दिखा। लेकिन दिन चढ़ते ही वह भी काफूर हो गया। दोपहर में तो सूर्य के किरणों की ताप ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। सड़कों पर वाहन भले न हों दुकानों पर खरीदार की कमी नहीं थी। यह भीषण लगन का असर था।ड्ढr ड्ढr फतुहा का बाजार हो या बख्तियारपुर शहर, सब जगह दुकानें तो पूरी तरह सजीं ही थीं फुटपाथ पर सब्जी बेचने वालों की टोकरियां और फल बेचने वालों के ठेले भी लगे थे। लगन की मार और लोगों की उदासीनता बूथों पर साफ दिख रही थी। फतुहा बाजार में बूथ संख्या 203 और 204 के पास मौसमी का जूस बेच रहा असलम का कहना था कि इत्मीनान से शाम को वोट देंगे। पहले रात के भोजन का जुगाड़ तो कर लें। आम दिनों से आज बिक्री ज्यादा है। कई लोग वोटरों का जत्था लेकर भी दुकान पर पहुंच रहे हैं। वहीं साग बेच रही परमिला बूथ से निराश लौट आई और अपनी दुकान सजाकर बैठ गई। वोटर लिस्ट में उसका नाम ही नहीं मिला।ड्ढr ड्ढr बख्तियारपुर में चाय की दुकान पर खड़े राज कुमार सिंह रवाईच से खरीदारी के लिए बाजार आये हैं। वे नेताओं की कथनी और करनी में फर्क से परशन हैं। बरुण गांधाी पर रासुका लगाना भी उनकी नाराजगी का कारण है। अब तक वोट नहीं दिये लौटकर समय मिलेगा तो बूथ पर जाएंगे। विधिपुर में बूथ के पास चबूतर पर बैठे कुछ लोग भी इसी चर्चा में जुटे हैं। एक युवक कहता है- अगले कुछ दिनों में चलंथ बूथ बनाने होंगे। हर व्यक्ित के दरवाजे पर ईवीएम जाएगा तब कहीं जाकर लोग वोट देंगे। यह बताते चलें कि विधिपुर कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा का गांव है और वे खुद वहां कैंप कर रहे थे।

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