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300करोड़ रुपये महीने ज्यादा वसूल रही हैं बिजली कंपनियां

300करोड़ रुपये महीने ज्यादा वसूल रही हैं बिजली कंपनियां

बिजली की नई दरें लागू न होने के कारण दिल्ली वासियों को रोजाना लगभग दस करोड़ रुपये की चपत लग रही है और यह पैसा बिजली कंपनियों की जेब में जा रहा है।

दिल्ली बिजली नियामक आयोग के चेयरमैन ब्रिजेंद्र सिंह ने दिल्ली सरकार को लिखे पत्र में यह जानकारी दी है। सिंह ने पत्र में कहा है कि आयोग बिजली दरों में कमी करना चाहता है, लेकिन सरकार ने नई दरों की घोषणा करने से रोक दिया।

बुधवार को सिंह की ओर से दिल्ली सरकार को लिखे पत्र को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड भी किया गया है। सिंह के मुताबिक, दिल्ली की बिजली कंपनियों के पास लगभग 3,577 करोड़ रुपये का सरप्लस है, जबकि कंपनियां घाटे का झूठा दावा करके बिजली दरों में वृद्धि की लगातार मांग कर रही हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने आयोग द्वारा वर्ष 2010-11 के लिए नई दरों की घोषणा करने से रोक दिया था, क्योंकि बिजली कंपनियों ने गुहार लगाई थी कि आयोग ने उनके खातों की सही पड़ताल नहीं की है। सरकार ने आयोग से कहा था कि वह इस मामले में वैधानिक सलाह दे।

बुधवार को यही वैधानिक सलाह देते हुए आयोग के चेयरमैन ब्रिजेंद्र सिंह ने कहा कि नई दरों की घोषणा न होने के कारण बिजली कंपनियां पुरानी दरें वसूल रही हैं और इस कारण कंपनियां एक अप्रैल 2010 से हर माह लगभग 300 करोड़ रुपये अधिक वसूल रही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि यह पत्र केवल अध्यक्ष की ओर से लिखा गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि अन्य दोनों सदस्य यह वैधानिक सलाह देने से बच रहे थे। उनका आरोप है कि ये सदस्य सितंबर तक इसमें देरी करना चाहते थे, क्योंकि सितंबर में वह (चेयरमैन) रिटायर हो रहे हैं।

हालांकि सिंह का कहना है कि दरों में कमी करने का फैसला उनका अकेला नहीं था, बल्कि उस फैसले से सदस्य सहमत थे। सदस्य की सहमति संबंधी फैसले की प्रति भी इस पत्र के साथ संलग्न की गई है।

उधर इस पत्र के बारे में जब बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नियमानुसार यह वैधानिक सलाह मान्य नहीं है, क्योंकि इसमें आयोग के तीन में से दो सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

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