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संभलने की जरूरत

उथल-पुथल भरे 13 महीनों के शासन के बाद प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपालने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। जिन स्थितियों में उन्होंने कार्यभार संभाला था और जिस तरह 22 पार्टियों के गठजोड़ को संभालने का जिम्मा उन पर था उसमें यह काम आसान नहीं होना था। उनकी सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों में पिछले समझौतों और सहमतियों को लागू करने के लिए कटिबद्ध थी और वह शांति प्रक्रिया को एक सकारात्मक निष्कर्ष तक ले जाना चाहती थी। उसे राष्ट्रीय सहमति के आधार पर एक तय समय सीमा में संविधान तैयार करना था। जब यह सरकार बनी तो सहयोगी दलों की मान्यता थी कि माओवादियों के नेतृत्व वाली सरकार शांति और संविधान के दोहरे कार्यक्रम में विफल रही है। माना जा रहा है कि नई सरकार उसी को अपना असली मंत्र बनाएगी। माधव नेपाल ने माना भी कि माओवादियों की रुकावटों ने उनके काम को आसान नहीं रहने दिया था।
द काठमांडू पोस्ट, नेपाल

यूरोपीय घाटे पर रोक
यूरोपीय संघ की कार्यकारी संस्था यूरोपीय आयोग की योजना है कि अगले साल जनवरी से बजट घाटे को रोकने के लिए कठोर अनुशासन लागू किया जाए। यह दावा आर्थिक और मौद्रिक मामलों के आयुक्त ओली रीन ने किया है। इस योजना के तहत यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देश हर साल अप्रैल में अपने बजट के अहम पहलुओं को यूरोपीय सरकार के सामने आकलन के लिए प्रस्तुत करेंगे और वहां पर इसकी समीक्षा होगी । इससे आथिर्क नीतियों में बेहतर तालमेल हो सकेगा और किसी जोखिम वाले दायरे को पहचाना जा सकेगा। इसका मतलब यह नहीं कि सदस्य देश संसद में बजट पेश करने से पहले उसे यूरोपीय संघ की कार्यकारिणी में रखेंगे। बस उतनी ही सूचनाएं देनी होंगी जिसके आधार पर चर्चा की जा सके।
द वॉल स्ट्रीट जरनल, अमेरिका

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