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डीसी को जानें

डिस्कॉन्टिन्युटी चार्ज (डीसी), हाल में यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस योजना निर्देशों के साथ यह शब्द भी लोगों का ध्यान अपनी और खींच रहा है। जब आप किसी योजना को बीच में ही छोड़ना चाहते हैं या फिर प्रिमियम का भुगतान बीच में बंद करने के कारण आपकी योजना को रद्द किया जाता है, तब बीमाकर्ता कंपनी आपसे डीसी शुल्क लेती है, जिससे आपको ग्राहक बनाने के लिए बीमा कंपनी की लागत को पूरा किया जाता है। उस राशि को कम करके शेष रकम ग्राहक को लौटा दी जाती है।

इसको आप केवल योजना के शुरुआती चरण में सक्रिय करा सकते हैं। पहले वर्ष में यह अधिक लगता है। प्रत्येक बीतते वर्ष के साथ इसमें कमी आती रहती है और पांचवे साल में यह लगभग पूरा हो जाता है। इसमें कितना शुल्क लगता है यह जानने के लिए सबसे पहले उन ग्राहकों की बात करते हैं जिन्होंने वार्षिक इंश्योरेंस प्रिमियम 25 हजार से कम भुगतान किया होता है।

पहले वर्ष में योजना वापस करने पर वार्षिक प्रिमियम का 20 प्रतिशत अथवा फंड वैल्यू जो भी कम हो, उसकी कटौती कर दी जाती है। किसी भी स्थिति में आपसे तीन हजार से अधिक वसूला नहीं जाता। उदाहरण के लिए आपने दस हजार प्रिमियम का भुगतान किया है और आपके द्वारा निवेश किए जाने पर आपकी फंड वैल्यू 9900 रुपये होती है। अब यदि आप अपनी पॉलिसी वापस करना चाहते हैं तो आपसे आपकी फंड वैल्यू का 20 प्रतिशत यानी 1980 रुपये लिया जाएगा और आपको 7020 रुपये वापस कर दिया जाएगा।

दूसरे वर्ष में दर 15 प्रतिशत और अधिकतम  सीमा 2000 रुपये पर सीमित होती है। तीसरे वर्ष में यह दर 10 प्रतिशत और अधिकतम राशि 1500 रुपये और चौथे वर्ष में यह दर 5 प्रतिशत हो जाती है और कुल निश्चित सीमा 1000 रुपये होती है। ऐसे लोग जिन्होंने 25 हजार रुपये से अधिक प्रिमियम का भुगतान किया है उनसे डीसी अधिक लिया जाता है।

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