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वायु प्रदूषण का रिपोर्ट कार्ड देगा ‘आटोमेटिक एनालाइजर’

पर्यावरण की सेहत बिगाड़ रहे तत्वों का खुलासा करने के लिए शहर में ‘आटोमेटिक एनालाइजर’ लगा दिया गया है। जो शहर को वायु प्रदूषण का रिपोर्ट कार्ड देगा। एक महीने के बाद इसका संचालन शुरू हो जाएगा। उपकरण का डिस्पले लगाने के वास्ते शहर में जगह तलाशी जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर अजरौंदा चौक प्राथमिकता पर है। डिस्पले लगते ही हर रोज इंटरनेट पर शहर का प्रदूषण लाइव होगा। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, हरियाणा प्रदूषण बोर्ड, जिला प्रशासन की वेबसाइट पर इसको देखा जा सकेगा। हरियाणा  सरकार ने  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी है।
देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित दस शहरों में शुमार फरीदाबाद की फिजा में खतरनाक तत्व तैरते रहते हैं। जो लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। वाहनों का धुआं वायु में मिलकर पर्यावरण की सेहत खराब कर रहा है। साल में हजारों नए वाहन यहां रजिस्टर्ड हो रहे हैं। प्रदूषण बोर्ड के सर्वे के मुताबिक 70 फीसदी वायु प्रदूषण वाहनों के धुएं से हो रहा है। किस हद तक वायु प्रदूषित हो गई है, इसकी जांच के लिए हरियाणा सरकार ने शहर में ‘आटोमेटिक एनालाइजर’ लगाने का फैसला किया। करीब 80 लाख रुपये लागत आएगी। अब से पहले शहर को वायु में मिश्रित खतरनाक तत्वों की जानकारी नहीं मिलती थी। अब शहर के चौराहों पर लगे डिस्पले बोर्ड पर हवा की स्वच्छता की जानकारी लोग जुटा पाएंगे। शहर के मुख्य केंद्रों पर उपकरणों को लगाने के लिए जगह तलाशी जा रही है।
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रीजन आफिसर उमाशंकर शर्मा, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: जिला प्रदूषण बोर्ड के कार्यालय पर एक उपकरण लगाया दिया गया है। इसका डिस्पले लगाना है। जिस पर दिन-रात प्रदूषण की स्थिति से लोगों को अवगत करवाया जाएगा। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में अब से पहले यह सुविधा नहीं थी।
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शहर में वायु, जल, ध्वनि की स्थिति

वायु प्रदूषण: रिहायशी क्षेत्र में एसपीएम 200 व औद्योगिक क्षेत्र में एसपीएम 500 होना चाहिए। शहर में 300 से 500 तक एसपीएम है

ध्वनि प्रदूषण: औद्योगिक क्षेत्र में डैसीवल की सीमा दिन में 75 व रात में 70 होना चाहिए। रिहायश क्षेत्र में 55 व 45, कमर्शियल क्षेत्र 65 से 55 तथा साइलेंट जोन में यानी अदालत, अस्पताल में 50 से 40 होना चाहिए। बिजली कटौती में जनरेटर के इस्तेमाल से इसकी मात्र बढ़ गई है

जल प्रदूषण: पानी की हालत सबसे ज्यादा खराब है। दिल्ली के सीवर का पानी आगरा, गुड़गांव नहर में डाला जा रहा है। सीवरेट ट्रीटमेंट प्लांट के उपकरणों की दशा खराब होने से पानी में पीएच, एसएस, बीओडी, सीओडी काफी ज्यादा है
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हरियाण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कमेटी के सदस्य बसंत विरमानी: ‘आटोमेटिक एनालाइजर’ के रेट को लेकर पिछले दिनों विवाद खड़ा हो गया था। सरकार ने अब इसको दूर कर दिया है। डिस्पले बोर्ड पर लोगों को प्रदूषण की जानकारी दी जाएगी।
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इनका होगा डिस्पले
-एसपीएम
-आरएसएम
-एसओ टू
-एनओएक्स
-ओजेन
-बैजिम

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