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पानी नहीं दिया तो खोदा कुआं

‘कौन कहता है, आसमां में सूराख नहीं हो सकता- एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।’ स्थानीय बरहपुरा की एक गरीब महिला ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना भी हम साधारण लोग नहीं कर सकते। जिस तरह दशरथ मांझी ने अकेले ही पहाड़ काट कर रास्ता बना दिया था, उसी तरह बरहपुरा की इस महिला कमरुन ने पांच दिनों में अकेले एक कुआं खोद डाला। जिस तरह दशरथ मांझी की पत्नी को उक्त पहाड़ी रास्ते में एक दिन ठोकर लग गयी और अंतत: उन्होंने पहाड़ काट रास्ता बना कर ही दम लिया।ड्ढr ड्ढr उसी तरह कमरुन की बेटी को पड़ोसी ने पानी लेने से मना किया तो उसकी मां ने कुआं ही खोद डाला। मोहल्ला बरहपुरा की रहने वाली 50 वर्षीय कमरुन दूसरों के घरों में चौका बर्तन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। उसने बताया कि जुमा का दिन था। बेटी पड़ोसी के यहां पानी लाने गई लेकिन उसने अपने चापाकल से पानी नहीं लेने दिया। बेटी घर आकर रोने लगी। तभी उसने अपने घर में ही कुआं खोदने का निश्चय किया। कुआं खोदने वाले ने 800 रुपए मांगे। लेकिन इतना भुगतान करना उसके बस की बात नहीं थी। उसने खुद ही कुआं खोदने का फैसला किया और खुदाई में जुट गई।ड्ढr ड्ढr सुबह दूसरे के यहां चौका बर्तन करने के बाद 10 बजे से एक बजे तक वह कुएं की खुदाई में लगी रहती थी। 5 दिन मेहनत कर इसने लगभग 20 फीट कुआं खोदकर मोहल्ले वालों को दिखा दिया। कमरुन की बेटी रहमती ने बताया कि जब अम्मा ने घर में कुआं खोदना शुरू किया तो हमने कहा कि अम्मा कुआं खोद नहीं सकोगी। लेकिन अम्मा ने कहा कि अल्लाह पर भरोसा रख बेटी, कुआं जरूर खोदा जाएगा और पानी भी निकलेगा। कुआं खोदने के लिए कमरुन कुएं के अन्दर रहती और बेटी रहमती मिट्टी खींचती थी।

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