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सैर-सपाटा सिर्फ अकेले!

सैर-सपाटा सिर्फ अकेले!

दोस्तो के साथ कभी स्कूल-कॉलेज का वो कैंप या फिर कभी परिवार के साथ बिताए गए सैर-सपाटे के दिन याद होंगे। लेकिन क्या आप कभी अकेले घूमने गये हैं। जी हां अकेले घूमने का मजा ग्रुप के साथ घूमने से बिल्कुल जुदा है। अकेले घूमने के एकदम नए अनुभव को आप से बांट रहे हैं पंकज घिल्डियाल।

अकेले घूमने की चाबी अगर किसी के पास है तो वह आप हैं। टिकट बुक कराया, होटल की बुकिंग करवाई तो ठीक, नहीं करवाई तो भी ठीक। बैग उठाया और चल दिए दूर कहीं, जहां सिर्फ आप ही आप हों। आजकल बहुत से टूर ऑपरेटर अकेले यात्री के लिए अलग व्यवस्था करने लगे हैं, जहां कोई भी जोड़े में नहीं होता। है ना मजेदार बात। सभी आप जैसे। यह टूर आपके लिए भी काफी किफायती रहते हैं। अब बिल्कुल भी घबराने की आवश्यकता नहीं कि अकेले घूमने निकलने पर सारा दिन आपको होटल के कमरे में ही टीवी के साथ गुजारना पड़ेगा। यकीन मानें, यह आपके जीवन के ऐसे यादगार अनुभव में से एक होगा, जिसे आप कभी भूल नहीं पाएंगे।

सोचिए आप किसी रमणीय स्थल पर गए हुए हैं। वहां आपको यह अहसास होता है कि मानो पेड़-पौधे, कूह-कूह करती कोयल जैसे पक्षी आपसे बातें करने को उतावले हुए जा रहे हैं। भला किसी के साथ जाने पर आप उन के बीच घुल-मिल पाएंगे, क्योंकि किसी के साथ जाने पर आप आपस की बातचीत में ही मशगूल रहते हैं। किसी दूसरी ओर ध्यान ही नहीं जाता। अगर आपका स्वभाव घुमक्कड़ी है तो फिर क्या आप की पसंद की जगह जाने के लिए हर कोई तैयार हो पाता है! ऐसे में न चाहते हुए भी अपनी इच्छाओं का गला घोटना पड़ता है। अकेले घूमने जाने का सबसे बड़ा फायदा यही होता है कि जहां जाना चाहें, वहां जाने की पूरी आजादी होती है। जब आप अकेले होते हैं तो आपको लौटने की जल्दबाजी नहीं होती, सिर्फ एन्जॉय करते रहें उन पलों को।

जब आप कहीं अकेले पहुंचेंगे तो वहां हर दिन आपके पास नए-नए लोगों से मिलने का मौका होगा। आप उनकी संस्कृति को करीब से जान पाएंगे। अगर आपको लोगों के रहन-सहन, रीति-रिवाज आदि को जानने में रुचि है तो यह जरुरी नहीं कि आपके साथी को भी इन में दिलचस्पी हो। अगर नहीं तो साथी आपको वहां से चलने की भी जिद करेगा। ‘फिर कभी’ कह कर खुद को समझाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। लेकिन ये भी सच है कि न जाने उस जगह जाने का आपको फिर कब मौका मिले। घूमने-फिरने का मकसद सिर्फ यही नहीं होता कि आप नई-नई जगहों से वाकिफ हो रहे हैं, बल्कि यात्रा के दौरान या जहां आप रह रहे हैं, हो सकता है वहां किसी ऐसे शख्स से मुलाकत हो जाए, जो भविष्य में एक अच्छा मित्र बन जाए। वैसे भी सच्चा मित्र आपको कहीं भी, कभी भी मिल सकता है, जो आपके हर सुख-दुख का भागीदार भी होता है। घूमने-फिरने के अलावा हमारे कुछ ऐसे शौक भी होते हैं, जिन्हें व्यस्त कार्यक्रम के कारण हम सिर्फ उनके बारे में सोचते ही रहते हैं। मसलन पर्वतारोहण, स्कीइंग, वॉटर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, तैराकी, घंटों समुद्री किनारों पर बैठे रहना आदि। अगर कभी जाते भी हैं तो परिवार के लोग अपने डर की वजह से इन एडवेंचरस एक्टिविटीज में शामिल नहीं होने देते। अकेले जाने का फायदा यही होता है कि जो करना चाहें, उसमें कोई रोक-टोक न हो।

अकेले यात्रा में जाने से आप के सोच-विचार कर स्वयं निर्णय लेने से संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होगा। इससे स्वयं पर विश्वास और मजबूत होगा, क्योंकि सभी निर्णय आपके होंगे। आज का क्या कार्यक्रम होगा, कहां जाना है कहां नहीं, कब लौटना है, किसी की पसंद-नापसंद आप पर थोपी नहीं जा सकेगी। खुशी से बीत रहा हर लम्हा सिर्फ आपका होगा।

इसके अलावा यात्रा में बहुत सी कठिनाइयां भी आती हैं। आज से पहले आपके लिए परिवार का कोई सदस्य या कोई मित्र आपकी यात्रा को आरामदेय बनाते आये थे, लेकिन अकेले जाने से आप हर छोटी-मुश्किलों से रुबरु होते हैं। फिर भले ही यात्रा के दौरान अपनी व सामान की सुरक्षा हो या फिर बचत कैसे करनी है। इसका परिणाम होता यह है कि आप में वह जज्बा विकसित हो जाता है, जहां अकेला संघर्ष करना आपकी आदत में शुमार हो जाता है।

आप जिंदगी में आने वाली किसी भी कठिनाई से नहीं घबराते। फाइव स्टार होटल में काम करने वाले अंशुल शर्मा का कहना है ‘शुरू में मुझे लगा कि अकेले घूमने का प्लान बोरिंग न हो जाए। मैंने लोगों से सुना था कि मजा तो बहुत आता है। और सचमुच उनकी बात सही थी। मेरे यादगार सफर में हिमाचल का वह सोलो टूर भी है, जो मुझे आज भी रोमांचित करता है। वहां बिताया गया एक-एक पल आज मेरी यादों में कैद है। मुङो वहां एक ऐसा दोस्त मिला, जो पिछले तीन साल में मेरा सबसे अच्छा दोस्त बन चुका है।’

कुछ टिप्स

जहां आप जा रहे हैं, वहां के बारे में एक रिसर्च जरूर कर लें। मसलन वहां स्थित रिजॉर्ट्स, होटल व शहर का नक्शा।

घूमते वक्त उस शहर में आपको देख कर यह नहीं लगना चाहिए कि आप एक टूरिस्ट हैं, मसलन गले में लटका हुआ कैमरा, गाइडबुक आदि।

ऐसे कपड़े पहनें, जिनमें मस्त होकर घूम सकें। उतना सामान ले जाएं, जिसे आसानी से इधर से उधर ले जा सकें।

अपने साथ उतना ही कैश रखें, जितना एक दिन के खर्च के लिए पर्याप्त हो। अगर कोई हादसा होता है तो आप बिल्कुल खाली नहीं होंगे।

भोजन करते समय यह याद रखें कि वहां का स्थानीय खाना खाएं, न कि वो जो आप रोज खाते हैं।

बहुत से शहरों में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति बहुत अच्छी होती है। अगर संभव हो तो प्राइवेट टैक्सी से बचें। मतलब ऐसे टूर में कुछ भी मैकेनिकल न हो।

नए लोगों से मिलने में जल्दबाजी न दिखाएं। वे अच्छे भी हो सकते हैं और बहुत बुरे भी। खास तौर पर अगर आप एक
महिला हैं।

सोलो टूर से संबंधित साइट्स

1.  http://www.tigertravel.co.uk/
2. http://www.chinatraveldepot.com/
3.  http://www.soloholidays.co.uk/
4. http://www.cstn.org/news/getways.htm
5. http://morrismurdock.com/solo

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