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कस्तूरी की खुशबू खींच लाएगी जहां बेरीनाग

कस्तूरी की खुशबू खींच लाएगी जहां बेरीनाग

मौसम इतना ठंडा कि शाम को टैरेस पर बैठना मुश्किल। कंपकंपाते हाथों से कोई पहाड़ी चाय का आनंद ले रहा है तो कोई गुम है दूर दिख रही श्रृंखलाओं को निहारने में। शहरों में रहने वाले लोग जहां उमस भरी गर्मी से बेचैन हो रहे हैं, वहीं आप इस वीकएंड पर जा सकते हैं इस जगह यानी बेरीनाग, जहां प्रकृति और आपके बीच और कोई नहीं होगा।

उत्तराखंड के जिला पिथौरागढ़ में स्थित यह हिल स्टेशन देश के सुंदरतम हिल स्टेशनों में से एक है। बेरीनाग मंदिरों के अलावा चाय बागानों के लिए भी मशहूर है। चाय उत्पादन के लिए यहां का मौसम उत्तम माना जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से हिमालय का एक अलग नजारा देखने को मिलता है। यह एक छोटा-सा हिल स्टेशन है। इस क्षेत्र में बहुत से नाग मंदिर हैं मसलन धौरीनाग, फेनीनाग, कालीनाग, बासुकीनाग, पिंगलिनाग और हरिनाग। बेरीनाग

वॉटरफॉल के लिए भी जाना जाता है, जो 50 मी ऊंचा है।  इसके अलावा त्रिपुरा देवी मंदिर, कोटेश्वर गुफा मंदिर, कोटमान्या का डियर पार्क भी देखने लायक स्थान हैं। डियर पार्क में कस्तूरी मृग को देखा जा सकता है। दरअसल कस्तूरी की खुशबू आपको यहां पहुंचने से करीब 7 किमी पहले से ही आने लगेगी। माना जाता है कि बेरीनाग नाम यहां हुए नागवेनी राजा बेनीमाधव के नाम पर पड़ा।

यहां घुमड़-घुमड़ कर कब बादल बरसने लगेंगे, आपके लिए अंदाज करना जरा मुश्किल होगा, इसलिए अपनी तैयारी कुछ इस तरह करके जाएं, जिससे घूमने-फिरने का मजा किरकरा न हो। दरअसल शहरों की और यहां होने वाली बारिश में बहुत अंतर होता है और आमतौर पर बारिश के बाद मौसम में ठंडक पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। यहां की सुबह-शाम बेहद ठंडी हवाएं लिये होती हैं और यहां आकर होटल के कमरे में तो कैद कोई भी नहीं होना चाहेगा। इसलिए जब भी सैर-सपाटे पर निकलें तो मौसम के अनुसार कुछ गर्म कपड़े जरूर साथ रखें। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक छटा व मौसम के लिहाज से देश के खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक माना जाता है। इसके आसपास कोई ऊंची पहड़ियां नहीं हैं, जिससे इन उज्जवल पर्वत श्रृंखलाओं को देख पाना बेहद मनमोहक होता है। जब सुबह-सुबह का वक्त होता है तो बर्फीली पहाड़ियों पर सूरज की किरणें पड़ना, दोपहर व शाम के वक्त देखने का अलग-अलग नजारा भी क्या खूब होता है। प्राकृतिक सुन्दरता लिए मशहूर चौकोड़ी भी यहां से 10 किमी दूरी पर है। यह करीब 290 मी की ऊंचाई पर बसा है। बेरीनाग को जब चौकोड़ी से देखा जाता है तो ऐसा लगता है मानो आकाश के साथ जमीं पर तारे बिछा दिए गए हों। शहर की जलती रोशनी भी तारों सी झिलमिलाती दिखाई देती है। इस क्षेत्र का नजदीक शहर भी बेरीनाग ही है। यहीं से कुछ किमी की दूर पर है धर्माघर, जहां हिमदर्शन कुटीर भी है। जैसा नाम से ही पता चलता है, यहां से हिमालयन श्रृंखलाओं का नजारा देखने लायक होता है। धर्माघर के जंगलों में एशियाई भालू की विशेष प्रजाति की भी संख्या काफी अधिक है।

कहां ठहरें

नदी पार करके खूबसूरत व शांत जंगलों के बीच से गुजरते हुए आप जहां पहुंचेंगे, वहीं कुमाऊ मंडल विकास निगम का बंगला है, जो चौकोड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। कुमाऊ मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में ठहरने के लिए अग्रिम बुकिंग जरूर करवाएं, वरना घूमने-फिरने का मजा किरकिरा हो सकता है। इसके अलावा कुछ प्राइवेट लॉज भी है, जिनमें अपनी सुविधानुसार ठहरा जा सकता है।

पहुंचने का रूट

दिल्ली से करीब 490 किमी दूर है बेरीनाग, जबकि नैनीताल से यही दूरी 183 किमी रह जाती है। यहां के लिए नजदीकी  रेलवे स्टेशन है काठगोदाम। इसके बाद आपको बस या टैक्सी से आगे का सफर तय करना होगा। आप चाहें तो काठगोदाम में एक दिन रुक भी सकते हैं, क्योंकि आगे का 214 किमी़ पहाड़ी सफर जो तय करना होगा। पिथौरागढ़ में स्थित नैनी-सैनी यहां के लिए सबसे करीबी हवाई अड्डा है, जहां से बेरीनाग की दूरी 123 किमी है। बेरीनाग, अल्मोड़ा से 134 किमी दूर है।

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