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हड़ताल नहीं खेल: कोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि हड़ताली कर्मचारी अगर अपने विवेक से निर्णय लेकर हड़ताल समाप्त करंगे तो राज्य की जनता को खुशी होगी। लेकिन फिलहाल कोर्ट इस बार में कोई निर्देश नहीं दे रहा है। इस मुद्दे को ‘लीगल जिमनास्टिक’ न बनाया जाए। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रमौलि कुमार प्रसाद तथा न्यायमूर्ति श्याम किशोर शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनीं। उसके बाद हड़ताल को अवैध घोषित करने सम्बन्धी दायर लोकहित याचिका की सुनवाई शुक्रवार तक टालते हुए उपरोक्त टिप्पणी की।ड्ढr ड्ढr हड़ताली कर्मचारी यूनियनों की ओर से वरीय अधिवक्ता श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा विनोद कुमार कंठ ने अदालत को बताया कि मंगलवार की शाम को कोर्ट की नोटिस मिली है इसलिए वे अपने मुवक्िकलों से बातचीत नहीं कर पाए हैं। याचिकाकर्ता ‘जन चौकीदार’ की ओर से अधिवक्ता अरविन्द कुमार का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट हड़ताल को अवैध ठहरा चुका है, इसलिए राज्यकर्मियों को हड़ताल समाप्त करने को कहा जाए। इस बीच हड़ताली राज्यकर्मियों ने कानूनी लड़ाई के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। गुरुवार को वे हाईकोर्ट में अपना पक्ष पेश करंगे। खंडपीठ ने कहा कि हम लोग ‘मिलियन्स पीपुल’ के चेहरों को देख रहे हैं, इसलिए मुकदमे के बार में जो कुछ भी कहना है, वह अब शुक्रवार को ही सुना जाएगा।ड्ढr ड्ढr कोर्ट में मौजूद महाधिवक्ता पी. के. शाही ने बताया कि सरकार कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतनमान दे रही है। साथ ही एक उच्चस्तरीय कमेटी का भी गठन किया गया ताकि अगर वेतन को लेकर किसी प्रकार की असमानता रह गई हो तो उस पर विचार किया जा सके। उधर राजद हड़तालीकर्मियों के पक्ष में खुलकर उतर गया है। पार्टी ने इस मुद्दे पर 24 से शुरू विधानमंडल सत्र को ठप करने का ऐलान किया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक व डॉ. निहोरा यादव बुधवार को हड़तालियों की सभा में पहुंचे। सचिवालय सेवा संघ के प्रवक्ता डॉ. नित्यानंद सिंह ने कहा कि एक ओर सरकार मंत्रियों व अफसरों पर अनाप-शनाप व्यय कर रही है लेकिन कर्मचारियों को पैसा देने में खजाना खाली हो जाने का रोना रो रही है।

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