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जंगी पोतों का पीछा किए जाने से बौखलाया चीन

ब्लू वॉटर नेवी बनने की फिराक में पहली बार अपनी समुद्री सीमा से निकल सुदूर अदन की खाड़ी में तैनात चीन के दो विध्वसंक पोतों डीडीाी-171 हाईकाउ और डीडीाी-16वुहान और एक भारतीय पनडुब्बी के बीच गत 15 जनवरी आपसी में तनातनी हो जाने की खबर है। यह घटना सोमालिया के पास यमन और जिबूती को अलग करने वाले बाब अल मेंदाब जलडमरुमध्य में हुई। चीन ने गत छह जनवरी को समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए दो विध्वंसक और एक टैंकर इस क्षेत्र में तैनात किए थे।ड्ढr ड्ढr चीनी मीडिया में दावा किया गया है कि चीनी विध्वसंक पोत का पीछा कर रही भारतीय पनडुब्बी को दोनों विध्वंसकों ने घेरा और सतह पर आने को मजबूर किया। समुद्र में यह तनावपूर्ण स्थिति आधा घंटा तक रही लेकिन बाद में सभी अपने रास्ते पर चुपचाप निकल गए। उधर, भारतीय नौसेना के प्रवक्ता का कहना है कि चीन द्वारा जिस पनडुब्बी के सतह पर आने का दावा किया जा रहा है वह भारतीय पनडुब्बी नहीं थी। प्रवक्ता ने इस सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार किया कि उस क्षेत्र में कोई भारतीय पनडुब्बी थी या नहीं। प्रवक्ता का कहना है कि पनडु्ब्बियों के अभियानों और तैनाती को गोपनीय रखा जाता है। यदि भारत को चीनी पोतों के बार में जानकारी लेनी ही होती तो मलक्का जलडमरुमध्य में इनके प्रवेश करते ही हमार टोही विमान, पोत या यूएवी एसा कर सकते थे।ड्ढr ड्ढr वैसे भी अंतरराष्ट्रीय जल में ताकत के बल पर किसी पनडुब्बी को सतह पर आने को मजबूर नहीं किया जा सकता। यदि एसा होता तो यह युद्ध छेड़ने वाली घटना हो जाती। चीनी मीडिया में दावा किया गया है कि चीनी पोत के कप्तान ने पनडुब्बीनाशक हेलीकॉप्टरों के जरिए पनडुब्बी नाशक टारपिडो दागने की तैयारी कर ली थी। सूत्रों के मुताबिक यह संभव है कि चीनी पोतों के सिग्नेचर कैच करने के लिए किलो क्लास की कोई भारतीय पनडुब्बी हिन्द महासागर में प्रवेश करते ही उनके पीछे लग गई हो।

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  • Web Title: जंगी पोतों का पीछा किए जाने से बौखलाया चीन