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पांच न्यायाधीशों से सीबीआई पूछताछ

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में गाजियाबाद के पीएफ घोटाले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एक तथा हाईकोर्ट के चार जजों से पूछताछ की है। न्यायपालिका के इतिहास में यह पहला मौका है जब उच्च न्यायपालिका के कार्यरत जजों से किसी आपराधिक मामले में पूछताछ की गई है। इनमें सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस तरुण चटर्ाी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुशील हरकोली, जस्टिस तरुण अग्रवाल, जस्टिस आर मिश्रा तथा उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज जस्टिस जे एस रावत शामिल हैं।ड्ढr ड्ढr सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने गत माह इस मामले में जजों से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी। सीबीआई की इस अर्जी को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के जी बालाकृष्णन ने स्वीकार कर लिया और पूछताछ की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट के उक्त चार जजों का मुख्य न्यायाधीश गत माह स्थानांतरण कर चुके हैं। वहीं इससे पूर्व घोटाले में लिप्त इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस ए के सिंह (अतिरिक्त जज) को सुप्रीम कोर्ट कालेजियम कंफर्म करने से इनकार कर चुका है। इस संबंध में कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा, ‘जजों के पूछताछ की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन ऐसी स्थिति के लिए उच्च न्यायपालिका खुद जिम्मेदार है।’ मंत्री ने कहा, ‘उन्हें अपना ऐसा कोई मैकेनिज्म बनाना चाहिए था, जिसमें जजों से पूछताछ की व्यवस्था होती।’ क्या है पीएफ घोटालाड्ढr पीएफ की सात करोड़ रुपये से ज्यादा राशि के इस घोटाले में इन जजों पर महंगे उपहार- लैपटाप, फर्नीचर, फ्रिा, टीवी और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं तथा परिानों के लिए टूर आदि का बंदोबस्त करने का आरोप है। गाजियाबाद में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के इस पैसे को नजारत विभाग में तैनात कर्मचारी आशुतोष अस्थाना ने ठिकाने लगाया। गत वर्ष गाजियाबाद जिला जजी में जज इंचार्ज रमा जन को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए गए बयान में उसने 34 लाभान्वित जजों के नामों का खुलासा किया था। इनमें से 24 जज निचली अदालतों के हैं।

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  • Web Title: पांच न्यायाधीशों से सीबीआई पूछताछ