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टिकट जांच अभियान का हो नहीं रहा असर

चलेंगे बिना टिकट पर एसी कोच में। भला इस गर्मी में स्लीपर व जेनरल कोच में कौन बैठे झुलसने को। बेटिकटों के लिए इन दिनों एसी कोच फेवरिट बन गया है। भीषण गर्मी से बचते हुए कूल-कूल सफर होता है। बेटिकट यात्री पैसेंजर ट्रनों से सफर करने में अमूमन परहेज ही करते हैं। पैसेंजर ट्रनों में इन्हें भला एसी की ठंडी हवा कहां मिलने वाली है। आराम से पटना जंक्शन पर एसी कोच में सवार हो जाते हैं डेली पैसेंजरी करने वाले छुटभइए नेता, स्टूडेंट्स आदि। इतना ही नहीं बेटिकट होते हुए भी इनकी धौंस के आगे टीटीबाबू भी हिचकिचा जाते हैं। लोकल से कौन पंगा मोल ले। दानापुर रल मंडल के अंतर्गत चलने वाले ट्रनों में आसपास के डेली पैसेंजरी करने वाले यात्री से बोनाफाइड यात्री भी सहमे रहते हैं। ऐसे बेटिकट डेली पैसेंजर जब आरा, बक्सर, दानापुर, बिहटा, तारगना, जहानाबाद आदि स्टेशनों पर उतर जाते हैं तब बोनाफाइड पैसेंजर राहत की सांस लेते हैं।ड्ढr ड्ढr खासकर सुबह में दिल्ली की ओर से आने वाले मेल व एक्सप्रस ट्रेनों में बक्सर से ही डेली पैसेंजर एसी कोचों में घुसने लगते हैं। पटना तक का सफर कूल जो हो जाता है। इधर शाम के बाद दिल्ली, रांची व टाटा आदि जहगों के लिए खुलेन वाली एक्सप्रस ट्रेनों की एसी कोचों में भी ये बेटिकट यात्री बिना डर-भय के बैठकर सफर करते हैं। इनके उतरने के बाद ही टीटीई भी एसी कोचों में जाने का साहस कर पाते हैं। हालांकि समय-समय पर दानापुर रल मंडल के कमर्शियल विभाग द्वारा चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है पर बस कुछ पकड़े जाते हैं और जुर्माना चुका कर छूट जाते हैं। अगले दिन से फिर वही चलता है। बुधवार को भी पटना जंक्शन पर ऐसे बेटिकट व अनधिकृत सफर करने वाले यात्रियों की धर-पकड़ हुई। 6पकड़ गए जिसमें 42 तो जुर्माना देकर छूट गए पर बाकी 22 को जुर्माना नहीं देने के कारण जेल की हवा खानी पड़ी।

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