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19 जनवरी, 2020|1:14|IST

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बहुत दूर की कौड़ी खेली भाजपा ने

भाजपा नेताओं का झामुमो के प्रति प्रेम अनायास ही नहीं उमड़ा है। राजनीतिक गलियार के धुरंधरों की मानें, तो यह भाजपा द्वारा खेली गयी दूर की कौड़ी है। उनका मानना है कि एक्शन का रिएक्शन तो होगा ही। परिस्थिति वैसी बनी तो भाजपा को इसका लाभ भी मिलेगा। जसा कि रघुवर दास ने कहा भी है कि राजनीति में भाजपा के लिए कोई दल अछूत नहीं है। इससे भी कुछ यही संकेत मिलता है।ड्ढr सूत्रों का कहना है कि भाजपा और खास कर लालकृष्ण आडवाणी इस बार लोकसभा चुनाव जीतने के लिए हर तरह की रणनीति पर काम कर रहे हैं। झामुमो की ओर बढ़ाया गया हाथ उसी का अंग है। ताकि सोनिया गांधी से हाल में होनेवाली मुलाकात में अगर शिबू सोरन का दिल टूटा, तो भाजपा को मरहम पट्टी का मौका मिले। फिर झामुमो के साथ गठबंधन कर भाजपा राज्य की सभी 14 लोकसभा सीटों पर पताका फहराने की स्थिति में आ सके। अगर चुनाव पूर्व ऐसा संभव नहीं हो सका, तो चुनाव बाद भी दोस्ती की संभावना बनी रहे।ड्ढr इसके अलावा भाजपा ने झामुमो की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा कर झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को भी चेताने का काम किया है कि अब वह झामुमो के साथ ही गठबंधन करके झाविमो को सबक सिखा सकती है। इसलिए अभी भी झारखंड की राजनीति में बने रहने के लिए मरांडी के पास वक्त है।ड्ढr वैसे जानकारों का यह भी कहना है कि सोरन भाजपा से अधिक कांग्रेस को विश्वसनीय मानते हैं, जिसने अब तक उन्हें दो बार सीएम बनाया। पर झामुमो-भाजपा गठाोड़ से फिलहाल झारखंड में कोई नयी सरकार बनने की संभावना नहीं दिखती कि इसकी भनक मिलते ही केंद्र तत्काल विधानसभा भंग करने का कदम उठा सकती है।

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