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8 जुलाई, 2020|5:19|IST

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आनलाइन डिग्री प्राप्त करने के लिए केंद्रीय कानून बनेगा: सिब्बल

आनलाइन डिग्री प्राप्त करने के लिए केंद्रीय कानून बनेगा: सिब्बल

सरकार देशभर के छात्रों की स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की सभी डिग्रियों के कम्प्यूटरीकरण के लिए एक केंद्रीय कानून बनाएगी और इस संबंध में एक विधेयक संसद के आगामी सत्र में लाया जाएगा।
 
इसके अलावा वर्ष 2011-12 शैक्षणिक सत्र से देश के सभी उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्डों में विज्ञान और गणित का एक समान कोर्स लागू हो जाएगा।
 
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को यहां केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (केब) की 57वीं बैठक के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी।

सिब्बल ने बताया कि केब की बैठक में प्रस्तावित राष्ट्रीय शैक्षिक डिपाजटरी विधेयक-2010 को मंजूरी दे दी गई जिसमें केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राज्य शिक्षा बोर्ड, उच्च शिक्षा संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों की सभी तरह की डिग्रियों को कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा जिससे कोई भी छात्र अपनी डिग्री को आनलाइन प्राप्त कर सके।

इससे डिग्रियों के सत्यापन की दिक्कतों से छात्रों को मुक्ति मिल जाएगी एवं उन्हें इसके लिए स्कूलों, कालेजों का चक्कर नहीं लगाना पडेगा। उनकी डिग्रियां भी कम्प्यूटर में सुरक्षित रहेंगी जिससे उनके गायब या चोरी होने का खतरा नहीं रहेगा।

सिब्बल ने बताया कि केब की बैठक में वाणिज्य विषय के लिए भी एक समान राष्ट्रीय पाठचर्चा बनाने पर सहमति हुई। केन्द्रीय राज्य शिक्षा बोर्ड संगठन (कोबसे) की रिपोर्ट आने के बाद इस पाठ चर्चा को भी तैयार किया जाएगा।
 
उन्होंने बताया कि बैठक में देशभर में विभिन्न तरह की पेशेवर शिक्षा को स्तरीय रुप प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक योग्यता फ्रेमवर्क बनाने को भी मंजूरी दे दी गई। इसके लिए एक अन्तर समिति ग्रुप का गठन किया जाएगा जिसमें राज्य सरकारों के प्रतिनिधि भी होंगे।
 
उन्होंने बताया कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारें केन्द्र से 90 प्रतिशत फंड की हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। इसके लिए इस मसले को वित्त मंत्रालय की खर्च समिति के पास भेजा जाएगा और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

सिब्बल ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान आयोग गठित करने के लिए प्रस्तावित विधेयक पर भी केब की बैठक में आम सहमति बन गई है पर कुछ राज्य सरकारों को तथा सदस्यों को इस पर आपत्ति है, इसलिए उन्हें चार सप्ताह का समय दिया गया है ताकि वे अपना पक्ष टास्क फोर्स को सौंप दें। इसके बाद टास्क फोर्स इस विधेयक को अंतिम रुप देगा और इस संबंध में फिर विधेयक को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा।

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