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सुप्रीम कोर्ट का सेबी को कार्रवाई निर्देश देने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को शुक्रवार को निर्देश देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान निवेशकों के साथ धोखाधड़ी में लिप्त कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर सेबी को निर्देश देने से मना कर दिया। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मनोहर लाल शर्मा को इस मामले को दिल्ली या बम्बई हाई कोर्ट में उठाने की सलाह भी दी। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा कि 1में अपने गठन से लेकर अबतक ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की बात सामने आने के बाद भी सेबी ने धोखेबाज कम्पनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन होता है। उन्होंने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 21 में नागरिकों को जीवन जीने और अपनी आजीविका संरक्षित रखने का मौलिक अधिकार प्रदत्त है। उन्होंने कहा कि सेबी कानून की धारा 11 के तहत बोर्ड निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य है। इसके तहत सेबी को वित्तीय अनियमितताआें की स्थिति में संबंधित कम्पनियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने और निवेशकों के हितों को संरक्षित करने का अधिकार प्रदान किया गया है। याचिकाकर्ता ने विभिन्न कंपनियों द्वारा सार्वजनिक निर्गमों के जरिए निवेशकों को चूना लगाने की कई घटनाआें का उल्लेख करते हुए दलील दी कि 1से लेकर अब तक ऐसी घटनाआें पर सेबी ने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। हालांकि खंडपीठ ने सेबी को निवेशकों के साथ धोखाधड़ी में शामिल कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने से मना कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को जनहित याचिका वापस ले लेने की सलाह दी, जिसे उन्होंने मान लिया।

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  • Web Title: कोर्ट का सेबी को कार्रवाई निर्देश से इनकार