अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आखिर किसकी जिम्मेदारी है रिंकू?

देखने-सुनने और बोलने में असमर्थ रिंकू की बेबसी की कहानी आपने कल ‘हिन्दुस्तान’ में पढ़ी। वह प्रकृति के कोप का शिकार न होता तो माँ-बाप ही क्यों त्यागते! स्वस्थ-सामान्य होता तो इस ‘लड़के’ को गोद लेने के लिए लालायित लोगों की लाइन लग सकती थी। लेकिन ‘मल्टीपल डिसेबल’ रिंकू को कौन रखे? ‘एहसास’, ‘पुनर्वास’ जसी संस्थाओं और बाल रोग विभाग के डॉक्टरों ने उसकी यथासंभव मदद की। कई दानी-दयालु भी िरकू की मदद के लिए आगे आ जाएँगे। पर सवाल यह है कि िरकू आखिर किसकी जिम्मेदारी है? रिंकू कोई अकेला तो नहीं। ऐसे लाचार लोग हमार समाज में किसकी जिम्मेदारी होने चाहिए? ‘कल्याणकारी राज्य’ की अवधारणा वाले इस तंत्र की क्या भूमिका होनी चाहिए?ड्ढr शुक्रवार को ‘हिन्दुस्तान’ ने जिम्मेदार ओहदेदारों और समाजसेवियों के सामने यह दहकता सवाल रखा। जवाब आया- ‘ऐसे बच्चे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी हैं। इसका आशय है कि राज्य की जिम्मेदारी।’ मगर कड़वी सच्चाई यह है कि राज्य ने ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना ही नहीं बनाई। यह त्रासदी ही तो है कि नीति नियंताओं ने ‘मल्टीपल डिसेबल’ बच्चों को ‘दुत्कार और सहानुभूति’ से दो-चार होने के लिए छोड़ दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी डीके सिंह कहते हैं -‘हमार विभाग में ऐसे बच्चों के लिए कोई योजना नहीं है। विकलांग कल्याण विभाग में जरूर कोई योजना होगी।’ड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आखिर किसकी जिम्मेदारी है रिंकू?