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आतंकवाद ही होगा भाजपा का चुनावी मुद्दा

चुनावी मुद्दों की किल्लत से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी अपने हाथ से निकल चुके आतंकवाद के मुद्दे को ही आगामी लोकसभा चुनाव में प्रमुखता से पेश करने का फैसला किया है। मुबंई 2611 की घटना के बाद कांग्रेस ने आतंकवाद के मुद्दे को भाजपा के हाथों से लगभग ले लिया है। इस मसले पर वह भाजपा से भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में मुद्दा छिनने का भय साफ-साफ दिखा। बैठक को संबोधित करते हुये अध्यक्ष राजनाथ सिंह यहां तक कह गये कि कांग्रेस को आतंकवाद का राजनीतिक लाभ लेने के लिये युद्धोन्माद नहीं फैलाना चाहिये। याद रहे कि बीते दिनों कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान यदि आतंकवाद के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है तो सीधी कार्रवाई के विकल्प खुले हैं। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने बताया कि अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस द्वारा युद्ध को राजनीतिक लाभ का उपकरण नहीं बनाया जाना चाहिये। जब लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं,ऐसे में इस तरह का संकेत दिया जाना ठीक नहीं है। इस सवाल के जवाब में कि कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुये सैनिकों का सार्वजनिक सम्मान कर पार्टी ने राजनीतिक लाभ लिया था, तो प्रसाद ने कहा कि सरकार का शहीदों के प्रति सम्मान देने का फैसला था। वहीं राजनाथ ने मोदी के विकास माडल को कठघर में खड़ा करते हुये कहा कि अर्थव्यवस्था के साम्यवादी और पूंजीवादी दोनों ही मॉडल असफल हो चुके हैँ। ऐसे में गांधी व दीनदयाल उपाध्याय के आर्थिक चिंतन पर नया मॉडल गढ़ने की जरूरत है। राजनाथ के इस हमले से मोदी को चुनाव प्रबंधन की कमान देने के सवाल पर उनकी आडवाणी से छिड़ी जंग सार्वजनिक हो गई है। राजनाथ ने चुनावी रणनीति का खुलासा करते हुये सवाल किया कि यूपीए बताये कि उसका पीएम कौन होगा?

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