DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पुस्तक मेला चलता-फिरता तीर्थ: नामधारी

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि पुस्तक मेला चलता-फिरता तीर्थ है। इसकी वजह से पाठकों को पुस्तक के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ता। जनप्रतिनिधि इसके करीब होते, तो लोकतांत्रिक ढांचे में परिवर्तन आ गया होता। किताब की उपयोगिता कभी कम नहीं होगी। वह छह फरवरी को जयपाल सिंह स्टेडियम में पुस्तक मेला के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। नामधारी ने कहा कि पुस्तकों के ज्ञान का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है। इसके साथ रहने वाले खुशकिस्मत होते हैं। यह अच्छी दोस्त है। इसका स्वाद लेने की जरूरत है। इसके अदान-प्रदान होने से राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा। क्षेत्रवाद पर भी अंकुश लग सकता है। पुस्तक मेला से सांस्कृतिक का प्रचार-प्रसार होता है। डॉ श्रवण कुमार गोस्वामी ने कहा कि बिहार की तरह झारखंड में भी पुस्तक और पुस्तकालय नीति बननी चाहिए। किताबों का स्वरूप बदल सकता है। यह खत्म नहीं हो सकता है। राज्य गठन के बाद यहां की स्थिति नहीं बदली, सरकार जरूर बदलती गयी। डॉ दिनेश्वर प्रसाद ने कहा कि झारखंड में बड़ा पाठक वर्ग है। उनकी रुचि जानने का प्रयास कम हुआ है। प्रकाशक इस पर ध्यान देते, तो उन्हें बड़ा बाजार मिल सकता है। राजेंद्र रांन ने यात्रा पर प्रकाश डाला। संचालन जयश्री जयंती एवं स्वागत दीपक लोहिया ने किया। मेला दोपहर 12 बजे से रांची। पुस्तक मेला प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात नौ बजे तक चलेगा। प्रवेश शुल्क तीन रुपया रखा गया है। यहां प्रतिदिन सांस्कृतिक एवं अन्य आयोजन होंगे। सात फरवरी को शाम छह बजे से पुस्तक क्यों पढ़े विषय पर परिचर्चा होगी। आठ को लाफ्टर चैलेंज व नौ फरवरी को कविता-कहानी सुनाओ प्रतियोगिता होगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पुस्तक मेला चलता-फिरता तीर्थ: नामधारी