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बर्खास्त होंगे हड़ताली कर्मचारी

सरकार हड़ताली कर्मचारियों को बर्खास्त करगी। हड़तालियों को सबक सिखाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। शनिवार से बर्खास्तगी आदेश कर्मचारियों के घर पर भेजा जाना शुरू हो जायेगा। वहीं सरकार के बर्खास्तगी निर्णय से हड़ताली भड़क गए हैं। उनका कहना है कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो सरकार को इस तरह का निर्णय नहीं लेना चाहिए। बताया जाता है कि कार्रवाई की पहली गाज कृषि सेवा के अफसरों के साथ सचिवालयों के प्रशाखा पदाधिकारियों और सहायकों पर गिरगी जिनके नाम विज्ञापनों में प्रकाशित किये गये थे।ड्ढr ड्ढr बर्खास्त होने वाले कर्मियों की सूची को अंतिम रूप देने और आदेश तैयार को शुक्रवार की देर रात तक कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग में काम हुआ। राज्य के तीन लाख कर्मचारी 7 जनवरी से ही हड़ताल पर हैं। बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 8(2) के तहत सरकार ने हड़ताल को अवैध घोषित करते कर्मचारियों को दो-दो बार काम पर लौटने की चेतावनी भी दी। पर हड़तालियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। आखिर तमाम विभागीय प्रमुखों की मुख्य सचिव आर.जे.एम.पिल्लै की अध्यक्षता में हु्ई बैठक के बाद अब उन्हेंऔर मौका देने की बजाय सीधे बर्खास्त करने पर सहमति बन गयी है। कार्मिक सचिव आमीर सुबहानी ने बताया कि अब कर्मचारियों के लौटने के इंतजार का मतलब नहीं है। सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अनिल कुमार सिंह, राजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महासचिव रामबली प्रसाद ने कहा कि सरकार क्या हमें बर्खास्त करगी, कर्मचारी ही सरकार को बर्खास्त कर देंगे। ड्ढr हाईकोर्ट में सुनवाई सोमवार के लिए टलीड्ढr पटना (वि.सं.)। कर्मचारी यूनियनों के रवैए को लेकर सरकार सख्त है। शुक्रवार को महाधिवक्ता पी.के.शाही ने पटना हाईकोर्ट से कहा कि जबतक हड़ताल वापस नहीं होगी तब तक कोई वार्ता नहीं होगी। उधर कर्मचारी संगठनों के भी आंदोलन पर डटे होने से शुक्रवार को हड़ताल के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार के लिए टाल दी। इसके पहले कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रमौली कुमार प्रसाद तथा न्यायमूर्ति श्याम किशोर शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू हुई।ड्ढr ड्ढr अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की ओर से वरीय अधिवक्ता श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सचिवालय कर्मचारी संघ की ओर से वरीय अधिवक्ता विनोद कुमार कंठ तथा अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) की ओर से वरीय अधिवक्ता इन्दुशेखर प्रसाद सिन्हा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाया। उन लोगों का कहना था कि अभी तक सरकार की ओर से कोई बुलावा नहीं आया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि उनका महासंघ सबसे बड़ा है और हम चाहते हैं कि कोई सम्मानजनक हल निकले। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या आप लोग हड़ताल समाप्त करना चाहते हैं? इस पर वे साफ-साफ कुछ नहीं कह पाए। अदालत ने सुझाव दिया कि यूनियनें अपनी मांगों से संबंधित कागजात 11 फरवरी तक वेतन समिति को उपलब्ध करा दें जिस पर राज्य सरकार निर्णय लेकर कोर्ट को उससे अवगत करा सके। अदालत ने महाधिवक्ता से पूछा कि उन्हें कितना समय चाहिए। तो उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक विचार कर निर्णय कर लिया जाएगा।

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