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राजरंग

हम तुमसे जुदा होकर..हम तुमसे जुदा होकर, मर जायेंगे रो- रो कर। किसी ने दिल तो नहीं तोड़ा है, पर लट्टू की तरह नाचती लाल बत्ती की राह जुदा हो गयी। काटे नहीं कटती दिन और रात। एक-दूसर से मिलते ही सुनाने लगते हैं दिल की बात। पंद्रह दिन ही तो गुजर हैं, दिल का हाल बुरा है। गोल-गोल पुआ जसा गाल पिचकने लगा है। लाव- लश्कर की याद आती है। कैसहूं ललबत्तिया लौट जाये, सायरन बजे, कारोबार शुरू हो जाये इसकी चिंता खाये जा रही है। कहते हैं दिल का हाल सुने दिलवाला। तभी तो एक से दो हुए और उड़ चले दिल्ली। ये दिल्ली वाले आका भी बड़े बेरहम हैं। मौका ताड़कर गले लगाते हैं और मौका पाते ही दूर झटक देते हैं। ई जो लालटेन वाले मालिक हैं, इनका भी हाव- भाव बदल गया है। घास नहीं डाल रहे। अपने तो देश-दुनिया की यात्रा करते हैं। रो छुकछकिया को झंडी दिखाते हैं। हम कौन सा गुनाह कर दिये थे.। एक बार फिर से लाल बत्ती मिल जाये, तो दिखा देंगे कि काम कैसे होता है। 15 दिन का घाटा 15 मिनट में ठीक कर देंगे। लेकिन लगता है कि ग्रह साथ नहीं देने वाला।

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