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संपत्ति में पति-पत्नी को बराबर का हक मिले

परिवार की संपत्ति में पति-पत्नी दोनों की बराबर की साझेदारी हो, इसके लिए विभिन्न महिला संगठनों ने एक कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के सहयोगी होते हैं। वे मकान, गाड़ी, फर्नीचर आदि जो भी चीज खरीदते हैं, उस पर दोनों की बराबर की साझेदारी होनी चाहिए। साथ ही पति से तलाक लेकर या बिना तलाक लिए अलग रह रही महिलाओं को गुजारा भत्ता उनके उसी रहन-सहन को बनाए रखते हुए मिलना चाहिए, जो पति के साथ रहते हुए था। भारत में तलाकशुदा या बिना तलाक के अकेली रह रही महिलाओं के आर्थिक अधिकार और जायदाद में मालिकाना हक विषय पर आयोजित सेमिनार में एसी एकल महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा हुई। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न होने वाली एकल महिलाओं को पति से गुजारा भत्ता पाने के लिए काफी जद्दोहद का सामना करना पड़ता है। सालों तक मुकदमा चलने के बाद नाम मात्र का गुजारा भत्ता मिलता है या अक्सर वो भी गोल हो जाता है। प्रसिद्ध वकील कीर्ति सिंह ने कहा कि अलग रहने वाली महिला को पति की आय के आधार पर तुरंत गुजारा भत्ता दिया जाना चाहिए। बाद में परिवार के रहन-सहन का मूल्यांकन कर उसे कम-यादा जो भी हो, तय किया जा सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिाा व्यास ने कहा कि एकल महिलाओं के साथ-साथ विधवाओं को भी इस श्रेणी में शामिल करना चाहिए। जहां तक गुजारा भत्ता की बात है तो इसके लिए कानून में संशोधन होना जरूरी है। जनवादी महिला समिति की सहबा फारूखी ने दिल्ली के महिला सेल का जिक्र करते हुए कहा कि ज्यादातर सेल में पुलिस का व्यवहार महिला-विरोधी है। वे महिलाओं को ही दोष देते हैं और समझौता करने का दबाव बनाते हैं। स्त्री-धन दिलाना भी जरूरी नहीं समझते और न ही इस बार में कभी बात करते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को प्रशिक्षण देने और संवेदनशील बनाने की जरूरत है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद बृंदा करात ने कहा कि हमारी संस्कृति में पुरुष के बिना औरत को अधूरा माना जाता है।

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