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एमबीए ने क्रेचाी किया र..

एक दौर था, जब सरकारी नौकरियों का बड़ा क्रेा था, सरकारी नौकरी पाना हर स्टूडेंट का ख्वाब होता था। युवा सरकारी नौकरी पाकर काफी खुश होते थे और समझते थे कि जिन्दगी का सपना पूरा हो गया। भू-मंडलीकरण की आंधी ने 0 के दशक में ही इस ख्वाब पंख कतरने शुरू कर दिये। सरकारी नौकरियों का क्रेा धीर-धीर कम होने लगा। मल्टीनेशनल कंपनियों ने उनके लिये करियर के सार दरवाजे खोल दिये। मोटी तनख्वाह, हाई-फाई स्टेटस सिंबल, एक-से-एक स्टाइलिश और महंगी कार के शौक के साथ हवाई सफर का रंगीन ख्वाब आसान होता दिखने लगा। बस क्या था, सपने उड़ान भरने लगे। आज युवा प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरी, अच्छी सेलेरी पाकर अपने सपनों को साकार करने लगा। जिन सरकारी नौकरियों में रहकर हमार माता-पिता जिन्दगी भर कुछ नहीं कर पाते थे, वो अब युवा पल भर में करने लगे। यही वजह रही कि सरकारी नौकरियों का क्रेा कम हो गया और युवाओं को एमबीए-एमसीए क्रेाी करने लगे। माहौल ऐसा बदला कि लड़की के माता-पिता भी साप्टवेयर इंजीनियर, एमबीए दामाद खोजने लगे। यह निजी क्षेत्रों में करियर के प्रति युवाओं का क्रेा ही है कि कई निजी क्षेत्रों में छंटनी की रिपोर्ट मिलने के बावजूद मंदी के भूत का डरावना चेहरा भी युवाओं के इस जज्बे को डरा नहीं पाया है।ड्ढr यंगस्टर्स का मानना है कि मंदी ने दुनिया नहीं बदली, बल्कि इसके इकॉनोमिकल सिस्टम को दुरस्त करने की चेतावनी दी है। यही वजह है कि लीक से हटकर राह चुनने वाले राजधानी के ज्यादातर यंगस्टर्स एमबीए, बीसीए और एमसीए की तैयारी में जुटे हैं। राजधानी में आधे दर्जन से अधिक बेहतरीन कोचिंग संस्थान हैं, जहां इसकी तैयारी करायी जाती है। यहां लीक से हटकर स्टूडेंट़्स अपने सपनों को उड़ान भरने की जी तोड़ कोशिश में लगे हैं। खूब लगन और मेहनत से इसकी तैयारियों में रात-दिन जुटे रहते हैं, हां इतना जरूर है कि करियर को लेकर हर स्टूडेंट्स का दिल धड़क जाता है। ऐसे में यंगस्टर्स की पढ़ाई,परीक्षा, करियर,प्लेसमेंट को लेकर चिंता लाजिमी है।ड्ढr ड्ढr रांची के प्रमुख कोचिंग संस्थान एनआइबीएम-हरिओम टावरड्ढr एएमएस- महावीर टावर,ड्ढr कैरियर लॉचर-सैनिक मार्केटड्ढr आइएमएस- गोशाला रोडड्ढr टाइम्स - सरकुलर रोडड्ढr सियोर सक्सेस - सरकुलर रोडड्ढr यूर्निवर्सल- मेन रोडड्ढr बेहतर तकनीकी संस्थानड्ढr जेवियर्स इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल साइंसड्ढr पुंदाग , इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंटड्ढr बिरला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजीड्ढr प्लेसमेंट :-ड्ढr इन संस्थानों में प्लेसमेंट बेहतर है। पुंदाग इंस्टीटय़ूट में होटल मैनेजमेट का क्रेा है, वहीं एक्सआइएसएस का रूरल डेवलपमेंट कोर्स (आरडी) देश भर में उम्दा माना जाता है। आरडी में यहां सौ प्रतिशत प्लेसमेंट है। सेल , विप्रो, इंफॉसिस, रिलायंस, टाटा, सीसीएल आदि कंपनियां प्लेसमेंट के लिये प्रत्येक वर्ष यहां आती है। कैंपस के माध्यम से छात्रों का चयन आसानी से हो जाता है। फीडबैक लें स्टूडेंट : एमके गुप्ताड्ढr एनआइबीएम के निदेशक एमके गुप्ता ने स्टूडेंट्स को ध्यान देना चाहिये कि वह यह जरूर पता लगाये कि जहां वे एडमिशन ले रहे हैं, उस इंस्टी्यूट का रिाल्ट कैसा है? स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट किस तकनीकी संस्थानों में हुआ है। वहां पढ़ रहे स्टूडेंट्स से मिलकर फीडबैक लें। वहां के फै कलटी मेंबर के बार में जानकारी हासिल करं। यह भी ध्यान दें कि संस्थान में लाइब्रेरी की व्यवस्था है कि नहीं? संस्थान पढ़ाई के नाम पर केवल मोटी फीस तो नहीं वसूल कर रहा है?ड्ढr रांची आइआइटी का मक्का, पर कॉलेज नहीं ..ड्ढr रांची को आइआइटी का मक्का माना जाता है। फिर भी अन्य राज्यों की तुलना में यहां से आइआइटी के रिाल्ट बेहतर हैं। फिर भी यहां आइआइटी इंस्टीटय़ूट नहीं है। मेडिकल के क्षेत्र में भी रांची का प्रदर्शन बेहतर रहा है। वजह यहां का एडुकेशन बेहतर है।ड्ढr कहां करं छात्र स्टडी :-ड्ढr सेंट्रल लाइब्रेरी , रांची कॉलेज कैंपसड्ढr स्टेट लाइब्रेरी, फिरायालाल के पीछेड्ढr इंटरनेशनल लाइब्रेरी, गोस्सनर कॉलेज के सामनेड्ढr सत्य भारती , पुरूलिया रोडड्ढr कामिल बुल्के , पुरूलिया रोडड्ढr ड्ढr करियर में आगे बढ़ने के लिये जरूरी टिप्सड्ढr बेहतर पर्सनालिटी, बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, बेहतर एडुकेशन, नेतृत्व के गुण, प्रशासनिक क्षमता, योगा और मेडिटेशन, जॉगिंग।एमबीए में रांची से हर साल प्लेसमेंट - लगभग 1 हाारड्ढr बैंक पीओ- वैकेंसी के अनुसार -200 से 250ड्ढr रलवे - 250 से 300

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