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रुपयों के लिए टलने लगीं बेटियों की शादियां

रामाशीष राम हो या दीनानाथ चौधरी या फिर रामसूरत राम। इनकी बेटियों अनुपमा, सीमा व अन्य के हाथ इस वर्ष पीले नहीं हो सकेंगे। रुपयों के अभाव में शादी की तिथियां टलती जा रही हैं। ये चंद उदाहरण है कुदरा बीज निगम के छंटनीग्रस्त कर्मियों का। कई ऐसे कर्मी हैं जिनकी बेटियों की शादी, परिानों का इलाज, बच्चों की पढ़ाई रुपयों के अभाव में नहीं हो रही है। दशरथ प्रसाद के मां-बाप इलाज के अभाव में दम तोड़ दिए तो बेटे विकास की पढ़ाई छूट गई।ड्ढr ड्ढr निगम के ढाई सौ अस्थाई कर्मियों को यह कहकर काम पर से हटा दिया गया था कि निगम की आर्थिक स्थिति सुधरने पर आपको पुन: रख लिया जाएगा। लेकिन, सात वर्षो बाद भी उन्हें काम पर नहीं रखा गया। जबकि इन कर्मचारियों का निगम पर दो करोड़ रुपया बकाया है। ये कर्मी बकाए राशि के भुगतान करने, उन्हें काम पर पुन: रखने, ठेके के मजदूरों को हटाने इत्यादि मांगों की पूर्ति के लिए पिछले 250 दिनों से निगम के गेट पर धरना दे रहे हैं। इस बीच कई दफे अफसरों व कर्मियों में वार्ता हुई। लेकिन, बात नहीं बनी। उक्त कर्मियों ने कहा कि राशि के अभाव में बेटियों की शादी नहीं हो रही है। बच्चों की पढ़ाई व बीमार परिानों का इलाज बंद है। पेट भरना मुश्किल हो गया है।ं

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