अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गांव की सैर करनी है, सरस मेले में आएं

गांधी मैदान में रविवार से चर्चित वसंत सरस मेला शुरू हो गया। सूबे सहित देश के विभिन्न प्रदेशों की कला व संस्कृति इस मेले के रूप में राजधानी में उतर आयी है। प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कला, बांस से बने बेजोड़ सामान, मिट्टी की एक से बढ़कर एक चीजों के साथ लिट्टी-चोखा, सिलाव का खाजा लोगों को लुभाने लगे हैं। साथ ही आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि से भी हस्तशिल्प के सामान पहुंचने लगे हैं। बारह दिवसीय इस ग्रामीण मेले का उद्घाटन ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी ने किया।ड्ढr ड्ढr केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार व प्रयास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मेले के मुख्य द्वार को गंगा द्वार नाम दिया गया है। मेले के ब्लॉकों के नाम भी नदियों पर रखे गए हैं। कमला, सोन, पुनपुन, कोसी, फल्गू ब्लॉक। गंगा द्वार में प्रवेश करते ही लगता है जैसे बिहार के किसी गांव में चले आए हों। हालांकि मेले में कुल 250 स्टॉल लगाए गए हैं पर पहले दिन महज कुछ स्टाल सज पाए थे। आयोजकों के मुताबिक दो दिन में सार स्टॉल सज जाएंगे। बिहार सहित पंद्रह राजें के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें आठ राज्यों के प्रतिनिधि आ चुके हैं। प्रयास के महासचिव व बाल अधिकार आयोग दिल्ली के अध्यक्ष आमोद कंठ व पटना के जिला विकास पदाधिकारी राजीव कुमार सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि मेले में हर दिन नुक्कड़ नाटक, सेमिनार, कार्यशाला होंगे।ड्ढr ड्ढr उनके अनुसार स्वर्णजयंती स्वरोजगार योजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित सामग्रियों को मार्केट प्रदान करने के मकसद से बसंत सरस मेले का आयोजन देशस्तर पर हो रहा है। बीपीएल परिवारों का सशक्तीकरण व उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने के साथ ही बाजार के हिसाब से माल बनाने में प्रशिक्षित करना भी मकसद है। पटना में यह मेला काफी सफल रहा है। पिछले साल लगभग चालीस लाख रुपए के सामान बिके। मेले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह आदि भी आएंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गांव की सैर करनी है, सरस मेले में आएं