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40 प्रतिशत बुजुर्गो के बैंक खाते नहीं

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की दूरदराज ग्रामीण इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के भरसक प्रयासों के बावजूद फिलहाल स्थिति यह है कि 40 प्रतिशत बुजुर्गो के अभी भी बैंक खाते नहीं हैं। एक अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार सेवा संस्था और वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा मिलकर किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक देश में एक बैंक शाखा औसतन 16 हाार से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराती है जबकि विदेशों में यह औसत 4500 ग्राहकों तक ही सीमित है। सर्वेक्षण में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी वित्त संस्थानों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कारोबार को मजबूत बनाने के लिए उनके विलय एवं अधिग्रहण के मामले में नियामकों और सरकार की तरफ से लचीला रुख अपनाए जाने की वकालत की गई है। सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका जैसे विकसित देशों में 0 प्रतिशत बुजुर्गो के बैंक खाते हैं। जबकि भारत में यह संख्या अभी 5प्रतिशत तक ही पहुंची है। भारत में जहां एक बैंक शाखा औसतन 16,12खाते चलाती है वहीं विकसित देशों में इसका औसत काफी कम है। ब्रिटेन में एक बैंक शाखा औसतन 4,484 खाते, अमेरिका में 2,720, जापान में 3,हांगकांग में 4,545 और जर्मनी में 1,लोगों के खाते ही चलाती है। देश में बैंकों की करीब 61 हजार शाखाएं हैं, इसके अलावा एक लाख के करीब सहकारी ऋण संस्थान केंद्र हैं तथा 12 हजार गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सर्वेक्षण में एक और बात जो सामने आई है उसके मुताबिक भारत में बैंक शाखाओं का स्वरूप इस तरह फैला हुआ है कि आठ बड़े बैंक के पास ही बैंकिंग कारोबार का 50 प्रतिशत हिस्सा है जबकि चीन में मात्र चार बैंक ही इतने हिस्से पर काबिज हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों का विलय कर उनके कारोबार को मजबूत बनाया जाना चाहिए।ं

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