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पप्पू विल वोट

पप्पू कांट वोट विज्ञापन के बाद मुझे देश में पप्पू की बढ़ती ताकत का भरोसा हो गया है। आप कुछ भी मानिये मेरा तो बस यही मानना है कि इस देश के लोकतंत्र को पप्पू ही जिंदा रखे हुये है। सव्रे करा लीजिये, ज्यादातर स्मार्ट लोग लफड़े के डर से पोलिंग बूथ जाते ही नहीं। वैसे भी ज्यादा बड़े लोग टीवी पर सव्रेक्षण और रिपोर्ट से ही सरकार का बनना-बिगड़ना देख लेते हैं। कुछ और हैं, जो वोटिंग के दिन होनेवाली छुट्टी को उत्सव और पिकनिक की तरह मनाते हैं वे पप्पू नहीं हैं। पप्पू कांट डांस सो पप्पू उत्सव और पिकनिक नहीं मना सकता पप्पू की ढेरों खासियत है। पप्पू भीड है और वह धूल-मिट्टी से खेलता है, सर्र्दी-गर्र्मी बर्दाश्त करता है, सस्त कपड़े पहनता है और ब्रांडेड आईटम को दूर से सलाम ठोकता है। पर पप्पू है बड़े काम की चीज, क्योंकि पप्पू भीड है और भीड एक ताकत होती है। पप्पू अपने अधिकारों के बारे में जानता है। पप्पू इतना जागरूक है कि वोटर लिस्ट में नाम लिखवाता है, चुनाव घोषणा-पत्र का अध्ययन करता है, चाय-पान की दुकान पर खड़े हो कर राजनैतिक हालात पर बहस करता है। वह आज भी सिांत तथा नैतिकता की उम्मीद करता है, बस उसकी एक कमीं है वह स्मार्ट नहीं है। फर्राटदार अग्रेंजी नहीं बोल सकता और न ही हाव-भाव से दूसरों को नीचा दिखान के लिये स्टाईलिश बन सकता है। पप्पू सीधा सरल इमोशनल और सच्चा है, इसीलिय वह भीड़ है प्लीज पप्पू कांट वोट मत कहिये। पप्पू चुप है, पर उसके भीतर आग धधकती है आप भल कहें पप्पू कांट वोट, पर मैं तो कहता हूं, कितने ही पप्पू चुनाव लड़ते और जीतते हैं वोट डालन की बात तो छोड़ ही दीजिये मुझे तो पूरा भरोसा है पप्पू विल वोट , प्लीज आप कुछ ऐसी ही अपील नान पप्पूओं के लिये जारी कर दीजिये, जिससे स्मार्ट लोग भी राजनीति में आयें इससे घबरायें नहीं, क्योंकि वाकई अब हमारा लोकतंत्र पप्पूनिज्म से बाहर निकल रहा है।

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  • Web Title: पप्पू विल वोट