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साझा आंदोलन के लिए एकचाुटता पर बल

झारखंड में विस्थापन के विरोध में संघर्षरत विभिन्न जनसंगठन एकाुट होकर साझा आंदोलन चलाने की जरूरत महसूस करने लगे हैं। इस उद्देश्य को लेकर अब एक इंच जमीन नहीं के नार के साथ सोमवार को यहां बहुबाजार स्थित एचपीडीसी सभागार में दो दिनी साझा सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें विस्थापन के खिलाफ संघर्ष कर रहे विभिन्न क्षेत्रों के 25 जनसंगठनों के लोग शामिल हुए।ड्ढr पूर्वाह्न 11 बजे सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में साझा कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि विस्थापन विरोधी आंदोलनों की एकता आज की जरूरत है। अब अकेले-अकेले लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। साथ ही आंदोलन को मजबूत करने और एमओयू के माध्यम से झारखंड में प्रवेश कर रही कंपनियों के प्रलोभन से बचने की भी चुनौती है। वक्ताओं ने कहा कि विकास की वर्तमान अवधारणा झारखंड के अनुकूल नहीं है। इसलिए आंदोलन को ईमानदारी से आगे बढ़ाना है।ड्ढr सम्मेलन में सामूहिक विकास का रास्ता तय करने पर बल दिया गया। कहा गया कि विस्थापन विरोधी आंदोलन की गंभीरता राजनीतिज्ञ और औद्योगिक घराने भी समझने लगे हैं। दावा किया गया कि प्रतिरोधी तेवर से वह डर गये हैं। सम्मेलन को दयामनी बरला, केसी मार्डी, फैसल अनुराग, फिलिप कुाूर, अख्तर हुसैन ने भी संबोधित किया। उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ के राजेंद्र शैल भी उपस्थित थे। जेरोम जेराल्ड कुाूर ने विषय प्रवेश कराया। लक्खी दास ने संचालन व धन्यवाद ज्ञापन रोलिना किस्कू ने किया। विस्थापन विरोधी सम्मेलन में जन संगठनों के प्रतिनिधि मिलबैठ कर एकाुटता पर विमर्श करंगे।

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