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घराने की विरासत से बाकियों की जंग

खीरी लोकसभा क्षेत्र के राजनीति दुर्ग पर 37 साल राज करने वाला वर्मा घराना एक बार फिर से सभी दलों के लिए चुनौती बना हुआ है। समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा इस विरासत से जुड़ी है। लिहाजा, विरासत बचाने के लिए हर कोशिश की जा रही है। बस, काँटा एक है कि इतने वर्षो बाद भी लखीमपुर खीरी जहाँ का तहाँ खड़ा है। इस सवाल का जवाब घराने के पास नहीं है कि आखिर ऐसा क्यों है? इसलिए बसपा, भाजपा और कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यहाँ सारी निगाहें मुस्लिम मतदाताओं के ‘स्विंग’ पर टिकी हैं। इस वोट बैंक के लिए सपा, बसपा और कांग्रस तीनों कंटिया डाले बैठे हैं। दिन-रात पहरदारी कर रहे हैं। भाजपा भी अपनी खोई जमीन पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है।ड्ढr लखीमपुर खीरी जिले में ‘छोटी काशी’ और दुधवा नेशनल पार्क के अलावा अगर किसी अन्य की पहचान है तो वह बालगोविन्द वर्मा घराने का। राजघराना न होते हुए भी बालगोविन्द वर्मा को लखीमपुर खीरी में उनकी ईमानदारी के कारण वह प्यार मिला जो राजा-रजवाड़ों को भी नसीब नहीं होता। 1से 1तक श्री वर्मा यहाँ के सांसद रहे। 10 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी उषा वर्मा 10 से लेकर 1तक सांसद थीं। 1में बालगोविन्द वर्मा के पुत्र रवि प्रकाश वर्मा सांसद चुने गए। सपा सांसद की हैसियत से वे अपनी हैट्रिक पूरी कर चुके हैं। संसद तक पहुँचने का सफर जारी रखने की राह मगर इस बार उतनी आसान नहीं।ड्ढr तेरह मई को मतदान होने हैं लेकिन तराई वाले इस शहर में चुनाव का कोई बुखार नहीं है। न तो झंडा, न ही बैनर। न ही कोई शोर। केवल रिक्शे से कुछ प्रचार चल रहा है। एक लाउडस्पीकर लगाकर। यहाँ पर किसी को चुनाव के बार में बात करने की फुर्सत नहीं है। सब अपने कामों में लगे हैं। बहुत कुरदने पर उनके मुँह से कुछ शब्द निकल आए तो गनीमत। आखिर वे चुप भी क्यों न रहें? वोट की राजनीति ने यहाँ वादे तो बहुत किए। मतदाताओं के अरमानों पर पंख भी लगाए। मगर फिर भुला दिया। अर्सा बीत रहा है, लखीमपुर को ब्रॉडगेज रलवे लाइन नसीब नहीं हो पाई है। दिल्ली जाना हो तो भागिए, शाहजहाँपुर या सीतापुर। तभी काम बनेगा। गोला गोकर्णनाथ और दुधवा नेशनल पार्क यहाँ की अमानत हैं मगर इसे अभी पर्यटक तीर्थ का दर्जा नहीं मिला। सड़क, बिजली, पानी की समस्याएं भी यहाँ की ऐसी मुस्तकिल समस्याएं बन गई हैं कि जनता का इससे पीछा ही नहीं छूटता। क्या मजाल कि बिजली आठ-दस घण्टे से ज्यादा नसीब हो जाए?ड्ढr समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रवि प्रकाश वर्मा को जनता की इन शिकायतों को सुनना पड़ता है। क्योंकि वे लगातार तीन बार से यहाँ सांसद हैं। बावजूद इसके सपा के लिए यहाँ काफी अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। एक तो रवि प्रकाश वर्मा अकेले कुर्मी प्रत्याशी हैं। पहले के चुनावों में इसी बिरादरी के और भी प्रत्याशी रहते थे जो वोट बांट लेते थे। दूसर, इस लोकसभा क्षेत्र की सभी पाँच विधानसभा क्षेत्रों में सपा का परचम लहरा रहा है। यहाँ से सपा का जिला पंचायत अध्यक्ष और एक एमएलसी भी है। इस तरह से यह सपा का गढ़ है।ड्ढr बसपा प्रत्याशी इलियास आजमी बसपा के वोट बैंक पर भरोसा रखकर गोटें चल रहे हैं। सबसे अधिक दलित वोटर भी यहीं हैं। गेहूँ खरीद, खाद की किल्लत, बिजली जैसे मुद्दों का समाधान न होना उनके खाते में जा रहा है। गन्ना बोया गया मगर मिलें चली नहीं। किसानों का पैसा भी नहीं मिला। इससे भी नाराजगी है। भाजपा प्रत्याशी अजय कुमार मिश्र टैनी इस क्षेत्र के नए प्रत्याशी हैं। दबंग परिवार से ताल्लुक रखने वाले श्री टैनी क्षेत्र में विकास के मुद्दे को जनसभाओं में रख रहे हैं। कांग्रस जमाने बाद यहाँ मजबूती से उतरी है। लखीमपुर सदर से दो बार विधायक रहे तथा पूर्व मंत्री जफर अली नकवी कांग्रस की सेकुलर छवि के चलते कामयाबी के रास्ते तलाश रहे हैं। मुस्लिम वोटों में कांग्रस भी पैठ बना रही है। ं

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