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क्यों न भेज दें एसपी को जेल : हाईकोर्ट

भागलपुर के एस.पी. को क्यों नहीं दो दिनों के लिए जेल भेज दिया जाए। पटना हाईकोर्ट ने गलत केस डायरी भेजने व अपराधियों से साठ-गांठ के एक मामले में कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने एस.पी. को पद पर तैनात रहने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बेईमान कहना गलत नहीं होगा। उन्हें एस.पी. नहीं सिपाही होना चाहिए। अदालत ने भागलपुर के जिला जज को आदेश की एक प्रति एस.पी. को देने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही एस.पी. को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए अपने स्तर से वकील रखने की पूरी छूट दी है अदालत ने कहा कि ऐसे एस.पी. का पक्ष रखने के लिए सरकार की ओर से सरकारी वकील मुहैया नहीं कराया जा सकता। उन्हें अपने पाकेट से वकील की फीस देनी होगी। अदालत ने कहा कि उन्हें दो दिनों के लिए जेल भेजने से पहले अपना पक्ष रखने की छूट है। मंगलवार को न्यायमूर्ति धरनीधर झा की एकलपीठ ने अपना गुस्सा का इजहार करते हुए कहा कि अपराधी को बचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है। मामला इसाकचक थाना कांड सख्या 508 (हत्या) से संबंधित है। हाईकोर्ट से प्राचार्यो को राहत नहींड्ढr पटना (वि.सं.)। मगध विश्वविद्यालय के प्राचार्यो को पटनाहाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने मगध विश्वविद्यालय के प्राचार्यो के स्थानान्तरण को चुनौती देने वाली सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति मृदुला मिश्रा की एकलपीठ ने यह आदेश मंगलवार को दिया। गत वर्ष नवम्बर में विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब पन्द्रह प्राचार्यो का स्थानान्तरण कर दिया था। पांच अलग-अलग रिट याचिका दायर कर स्थानान्तरण आदेश को चुनौती दी गई थी। प्राचार्यो की ओर से वकीलों का कहना था कि नए विश्वविद्यालय कानून के तहत कोई भी प्राचार्य पांच वर्ष तक ही किसी महाविद्यालय में पदस्थापित रह सकता है।ंं

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