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बच्चों में ‘पिता’ कम ‘माँ’ ज्यादा

इण्डियन कॉउन्सिल ऑफ फिलॉसफिकल रिसर्च के अध्यक्ष रामकृष्ण राव ने कहा है कि माँ का बच्चे पर पड़ने वाला प्रभाव पिता से कहीं अधिक होता है। ऐसे में जिस देश में माँ को कष्ट होगा, स्त्री के साथ दोयम दज्रे का व्यवहार किया जाएगा, वह देश भी दोयम दज्रे का हो जाएगा। श्री राव मंगलवार को साझी दुनिया के तत्वावधान में ‘लैंगिक सम्बन्धों के रूपान्तरण’ पर तीन दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में विचार व्यक्त कर रहे थे। समारोह का आयोजन अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान केन्द्र के प्रेक्षागृह में किया गया है।ड्ढr श्री राव ने कहा कि महिलाओं के साथ भेदभाव पुरुष और स्त्री के बीच शारीरिक अन्तर के कारण नहीं किया जाता बल्कि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें अधिक हैं। प्रसिद्ध स्त्रीवादी कार्यकर्ता फ्लेविया एग्निस ने कहा कि संविधान में समानता का सिद्धान्त होने के बावजूद प्रायोगिक रूप में इसे लागू नहीं किया जाता। संगोष्ठी में शिरीन मूस्वी, पूर्वा भारद्वाज, विभा चतुव्रेदी ने भी विचार रखे। ‘साझी दुनिया’ की सचिव प्रो. रूपरखा वर्मा ने विषय प्रवर्तन एवं संचालन किया। हिन्दी में ‘परवाज’ चढ़ी एग्निस की आत्मकथा लैंगिक सम्बन्धों के रूपान्तरण पर आयोजित संगोष्ठी के पहले दिन मंगलवार को प्रसिद्ध स्त्रीवादी कार्यकर्ता एवं ‘मजलिस’ संस्था की अध्यक्ष फ्लेविया एग्निस की चर्चित आत्मकथा ‘माय स्टोरी अवर स्टोरी’ के पत्रकार नासिरुद्दीन हैदर खाँ द्वारा किए गए हिन्दी अनुवाद ‘परवाज’ का लोकार्पण हुआ। स्त्रीवादी कार्यकर्ता डॉ. उर्वशी भूटालिया ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि उच्च मध्यवर्गीय और शिक्षित तबके में घरलू हिंसा का बेबाक अनुभवजन्य बयान करती यह पुस्तक हिन्दी में देर से मगर दुरुस्त आई है। इस मौके पर एग्निस ने कहा कि हर स्त्री बेटी, बहन, पत्नी, माँ या अन्य तमाम भूमिकाओं में हिंसा की शिकार होती है। ऐसी हिंसा कई बार शारीरिक तो कई बार भावनात्मक होती है। पुस्तक के अनुवादक श्री हैदर ने कहा कि एग्निस को प्रसिद्ध वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनके जीवन का एक पहलू यह भी है। पुस्तक में न सिर्फ उस हिंसक माहौल का वर्णन है जिसका उन्होंने सामना किया बल्कि इससे बाहर निकलने की जद्दोहद भी है।

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  • Web Title: बच्चों में ‘पिता’ कम ‘माँ’ ज्यादा