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चार घंटे तक थमा रहा शहर

भाकपा की पर्वितन रैली ने मंगलवार को राजधानीवासियों की दिनचर्या ही बदल कर रख दी। ऐन भोजन के वक्त की इस समस्या ने स्कूल से घर लौट रहे बच्चे, कारोबारियों तथा आम लोगों को दोपहर के भोजन से वंचित कर दिया। लाल झंडे की लम्बी कतार को लेकर दोपहर 12 बजे से अपराह्न् चार बजे तक पूरी तरह ठहरा रहा शहर।ड्ढr ड्ढr शहर के पूर्वी भाग से पश्चिमी और बेली रोड की ओर से कदमकुआं, राजेन्द्रनगर, कंकड़बाग, अशोक राजपथ की ओर जाना नामुमकिन रहा। शहर की हृदयस्थली डाकबंगला, प्रजर रोड और एक्जीविशन रोड होकर लिंक पथों की ओर जाने वाले हजारों की संख्या में भूखे-प्यासे लोग कामरडों को निहारते रहे। चार घंटे की इस जाम से सबसे अधिक परशान, बूढ़े, स्कूली बच्चे, महिलाएं व कामकाजी लोग हुए। दुकानदारों का कारोबार चौपट हुआ। अस्पताल में दूसरी शिफ्ट में ड्युटी पकड़ने को उतावली हो रही स्टाफ नर्स आयशा खानम ने स्टेशन गोलम्बर पर कहा कि ये राज्य सरकार के कामकाज से नाराज हैं तो उसकी सजा आम शहरी को क्यों दे रहे हैं? दनियावां के पास सड़क हादसे में घायल हुए सनोज को पीएमसीएच में एडमिट कराने आ रहे उनके बड़े भाई मनोज ने कहा कि आंदोलनकारियों की वजह से कई मरीजों की जान चली जाती है लेकिन इससे इनका क्या? बहरहाल इस रैली ने शहर के यातायात व्यवस्था की कचूमर निकाल दी। गांधी मैदान, शिवसागर राम गुलाम पथ, एक्ाीबिशन रोड, स्टेशन रोड, जंक्शन गोलंबर, डाक बंगला चौराहा, फ्रेार रोड, जेपी गोलंबर, छज्जूबाग, पीरमुहानी, भट्टाचार्या रोड, दलदली में हाारों की मौजूद भीड़ से सड़क जाम हो गया। शहरवासियों को वाहन चलाकर जाना तो दूर पैदल चलना भी दुश्वार था। रोड पर वाहनों की इतनी लंबी कतार थी कि दूर तक केवल वाहन ही दिख रहे थे। इन मार्गों से जुड़े लिंक पथों का हाल और बुरा था। बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। रैली के बीच से गुजरने के चलते कई जगह वाहन चालकों व समथर्कों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। फ्रजर रोड में कई वाहनों के शीशे भी फोड़े गये।

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