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धान केंद्रों पर बिचौलियों की चलती

हते हैं, ज्यों-यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया। पालींगंज में धान क्रय केन्द्रों की यही तल्ख हकीकत है। एसएफसी के केन्द्र तो जैसे खुले ही थे, बंद होने के लिए। क्योंकि गोदाम हफ्ते भर में ही फुल हो गए और खरीद बंद हो गई। एफसीआई के पालीगंज व सरसी दोनों केन्द्रों पर कहने को तो खरीद हो रही है, पर किसान अब भी परशान हैं। किसानों की मानें तो इसबार एफसीआई के कई वरीय व कनीय कर्मियों की मिलीभगत से बिचौलियों का इतना तगड़ा नेटवर्क बन गया है कि स्थानीय प्रशासन भी इनकी नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि रोज-रोज के बवाल, मारपीट व बिचौलियों पर लगाम लगाने के लिए पालीगंज एसडीओ प्रदीप कुमार ने पहले मजिस्टट्र व बल की तैनाती की। फिर केन्द्रों पर वीडियोग्राफी व हर किसान का फोटोग्राफी कराने का भी फरमान जारी किया। लेकिन एसडीओ का फरमान भी बेअसर रहा। अब तक वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी की व्यवस्था नहीं की गई है। नतीजतन किसान अपने धान औने-पौने दाम पर व्यापारियों के हाथों बेचने को मजबूर है। एक छोटे बिचौलिए ने नाम न छापने की शर्तपर बताय कि हर मोड़ पर सबको अलग-अलग हिस्सा देना पड़ता है। फिर भी 8 से 10 हजार तक एक ट्रैक्टर पर बचता है। उधर यह भी जानकरी मिली कि जिन कुछेक किसानों की तौल भी होती है, उसमें प्रति बैग मजदूर 3 रुपए लेते हैं। सरसी केन्द्र के एक मजदूर ने बताया कि 3 रुपए में से 60 पैसे ठेकेदार ले लेते हैं। कुल मिलाकर यहां के क्रय केन्द्र भ्रष्टाचार का अड्डा बने हुए हैं और किसान ठगेजा रहे हैं। वहीं उठाव की धीमी रफ्तार के चलतेपालीगंज में लाखों बोर धान यूं ही खुले आसमान तले पड़े बर्बाद हो रहे हैं। इस बीच एफसीआई के जिला प्रबंधक अयोक्या ठाकुर ने बताया कि उन्हें बीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराने संबंधी किसी भी प्रकार का मौखिक या लिखित निर्देश नहीं मिला है। केन्द्रों पर कुव्यवस्था के बाबत कहा कि पूर बिहार मं अभी यही स्थिति है।जब तक जगह-जगह अधिक क्षमता के गोदाम नहीं बन जाते प्राब्लम तो होगा ही। रही बात बिचौलियों की तोउन्हें रोकना विभाग के बूते से बाहर है। क्योंकि सभी किसान रसीद लाते हैं तभी खरीद होती है।

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