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14 जुलाई, 2020|3:06|IST

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मुकेश-अनिल अंबानी गैस विवाद का घटनाक्रम

मुकेश-अनिल अंबानी गैस विवाद का घटनाक्रम

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सिज लिमिटेड (आरएनआरएल) के बीच गैस आपूर्ति विवाद का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:-

फरवरी, 1999: अविभाजित आरआईएल और कनाडा की नीको रिसोर्सिज ने कृष्णा गोदावरी बेसिन में नई तेल उत्खनन लाईसेंसिंग नीति (नेल्प) के पहले दौर में केजी़ डीडब्ल्यूएन98.3 ब्लॉक हासिल किया।
   
अप्रैल, 2000: आरआईएल-नीको ने केजी़डी6 ब्लॉक के लिए सरकार के साथ उत्पादन भागीदारी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

अप्रैल, 2002: आरआईएल को केजी़डी6 ब्लॉक में गैस का बड़ा भंडार मिला, जिन खुदाई स्थलों पर गैस मिली उनके नाम धीरूभाई एक और तीन रखे गए।

सितंबर, 2003: सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी लिमिटेड ने अपने गुजरात स्थित कवास और गांधार विस्तार परियोजनाओं के लिए प्रतिदिन एक करोड़ 20 लाख घनमीटर गैस के लिए निविदाएं आमंत्रित की।
   
जून 2004: रिलायंस एनर्जी ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ दादरी में 3500 मेगावाट का दुनिया का सबसे बड़ा गैस से चलने वाला विद्युत संयंत्र लगाने का समझौता किया।

जून-जूलाई, 2004: आरआईएल को एनटीपीसी से गैस आपूर्ति का ठेका मिला। आरआईएल ने एनटीपीसी को 2.34 डॉलर प्रतिशत दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) पर केजी बेसिन गैस का भाव लगाया।

18 जून, 2005: रिलायंस समूह के बंटवारे के लिए अंबानी बंधुओं मुकेश और अनिल के बीच आपसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर, अनिल अंबानी ने संयुक्त प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दिया। बंटवारे के तहत मुकेश को पेट्रोलियम और पेट्रोरसायन व्यवसाय मिला जबकि अनिल अंबानी के हिस्से में बिजली, वित्तीय सेवायें और दूरसंचार व्यवसाय आया।

अगस्त, 2005: अंबानी बंधुओं ने आपस में एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा में नहीं उतरने का समझौता किया। आरआईएल बोर्ड ने बंटवारे की योजना को मंजूरी दी।

दिसंबर, 2005: एनटीपीसी बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंची, रिलायंस को बोली के अनुसार गैस आपूर्ति के लिए कहा।

10 जनवरी, 2006: आरआईएल बोर्ड ने पारिवारिक समझौते की शर्तों पर आरएनआरएल को गैस बिक्री के मास्टर समझौते के प्रारूप को मंजूरी दी।
   
12 जनवरी, 2006: आरआईएल बोर्ड ने तय किया कि अगर एनटीपीसी के साथ समझौते पर अमल नहीं होता है तो अनिल अंबानी समूह को प्रतिदिन 2.80 घनमीटर से लेकर चार करोड़ घनमीटर प्रतिदिन तक गैस आपूर्ति की जा सकती है।
   
26 जुलाई, 2006: पेट्रोलियम मंत्रालय ने आरएनआरएल को 2.34 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) के दाम पर प्रतिदिन 2.80 घनमीटर गैस आपूर्ति के आरआईएल के प्रस्ताव को नामंजूर किया।

7 नवंबर, 2006: आरएनआरएल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में आरएनआरएल के खिलाफ मामला दायर किया।

13 सितंबर, 2007: मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने गैस मूल्य निर्धारण के आरआईएल के फॉर्मूले को मामूली बदलाव के साथ मंजूरी दी। इसके तहत केजी बेसिन गैस का दाम पहले पांच साल के लिए
4.20 डॉलर प्रति एमबीटीयू तय किया गया।

अक्टूबर, 2007: मंत्री समूह ने गैस वितरण की प्राथमिकताएं तय की। पहली प्राथमिकता चालू उर्वरक संयंत्रों को दी गई, उसके बाद बिजली और इस्पात इकाईयों और शहरी गैस वितरण के लिए गैस आपूर्ति की मंजूरी दी गई।
    
जनवरी, 2009: बंबई हाईकोर्ट ने केजीडी6 ब्लॉक से गैस बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटाया। कोर्ट ने सरकारी नीति के अनुरूप गैस बिक्री की अनुमति दी।
    
15 जून, 2009: बंबई हाईकोर्ट ने आरआईएल को निर्देश दिया कि वह पारिवारिक एमओयू के अनुरूप आरएनआरएल को गैस आपूर्ति के लिए समझौते का मसौदा तैयार करे।
   
4 जुलाई, 2009: आरएनआरएल सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

5 जुलाई, 2009: आरआईएल भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

17 जुलाई, 2009: पेट्रोलियम मंत्रालय भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, कहा अंबानी परिवार के समझौते में गैस आपूर्ति मुद्दे को निरस्त किया जाए।

20 अक्टूबर, 2009: सुप्रीम कोर्ट में सभी अपीलों पर सुनवाई शुरू हुई।

4 नवंबर, 2009: न्यायमूर्ति रवींद्रन ने खुद को सुनवाई कर रही पीठ से अलग किया।
   
18 दिसंबर, 2009: मुख्य न्यायधीश केजी़ बालकृष्णन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

8 मई, 2010: सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला। कोर्ट ने गैस को सरकारी संपत्ति बताया और अंबानी बंधुओं को अगले छह हफ्ते में गैस विवाद पर कोई समझौता करने के निर्देश दिए।

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