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हमारे पायलटों की गलती नहीं : वायुसेना प्रमुख

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर ने मुंबई में राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टरों के हवाई अड्डे पर उतरते समय हुई घटना के बारे में बुधवार को साफ कहा कि इस घटना में वायुसेना के पायलटों की कोई गलती नहीं थी। एयर चीफ मार्शल ने संवाददाताआें के सवालों के जबाव में पहली बार इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वायुसेना के पायलटों का तर्कपूर्ण ढंग से बचाव किया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और वायु यातायात नियंत्रण (एटीसी) विभाग को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया। वायुसेना प्रमुख ने घटना की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में जो तथ्य पता चले हैं उनके मुताबिक राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टरों ने मुंबई स्थित नौसैनिक हेलीकाप्टर बेस ‘आईएनएस कुंजाली’ से उड़ान भरी थी और ये शुरू से ही सांताक्रूज की रडार फ्रीक्वेंसी पर थे। यह फ्रीक्वेंसी एटीसी ने ही दी थी। उन्होंने कहा कि काफिले के पहले हेलीकॉप्टर में राष्ट्रपति बैठीं थीं। दूसरे में उनके सुरक्षा स्टाफ तथा तीसरे में अन्य अधिकारी बैठे थे। एटीसी ने इन तीनो हेलीकाप्टरों को बारी-बारी से रन वे 27 पर उतरने की इजाजत दी थी। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि कोई भी हेलीकॉप्टर या विमान का पायलट अपनी फ्रीक्वेंसी नहीं बदल सकता है जब तक कि उसे एटीसी से ऐसा करने के न कहा जाए। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का विमान टावर फ्रीक्वेंसी पर था। उन्होंने कहा कि इन हेलीकॉप्टरों को वायुसेना के सबसे अनुभवी पायलट उड़ा रहे थे उनकी क्षमताआें पर उन्हें कोई शक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप खुद समझ सकते हैं कि वे देश की राष्ट्रपति को लेकर उड़ान भर रहे थे तो वे हमारे सबसे अनुभवी पायलट होंगे। यह पूछे जाने पर कि इस घटना को लेकर क्या वायुसेना की कार्यप्रणाली या व्यक्ितयों को लेकर कहीं कुछ दुरुस्त करने की आवश्यकता है? वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यदि कार्य प्रणाली दुरुस्त करने की कोई जरूरत है तो वह एटीसी और डीजीसीए में है, वायुसेना में नहीं। वायुसेना प्रमुख के इस बयान से मीडिया में आई उन खबरों का खंडन हुआ है कि राष्ट्रपति के हेलीकाप्टर के पायलट मुंबई एटीसी के संपर्क में नहीं थे।

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