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रैगिंग करते ही दफा करो: सुप्रीम कोर्ट

रैंगिग पर सख्ती करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि रैगिंग करने वाले छात्र को बिना प्रारंभिक जांच के कॉलेज और हॉस्टल से सस्पेंड कर दिया जाए और पुलिस को तुरंत सूचना दी जाए ताकि आपराधिक कानून के तहत उस पर कार्रवाई हो सके। कोर्ट ने कहा कि हर बार यह सवाल उठता है कि रैगिंग के आरोपी छात्र को भी अपने पक्ष में कुछ कहने का मौका दिया जाना चाहिए लेकिन देखा गया है कि मौका दिए जाने के नाम पर देरी हो जाती है, जिससे तुरंत कार्रवाई करने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। जस्टिस अरिाित पसायत की खंडपीठ ने आदेश में आगे कहा कि यदि विश्वविद्यालय या नियंत्रक प्राधिकार के संज्ञान में यह आता है कि कोई संस्थान या कॉलेज रैगिंग करने वाले छात्र को बचा रहा है तो ऐसे संस्थान की सहायता घटा दी जाए और यदि मामला ज्यादा गंभीर है तो उसकी आर्थिक सहायता बिल्कुल रोक दी जाए। कोर्ट ने कहा कि रैगिंग के बार में शिक्षण संस्थान अपने प्रॉस्पेक्टस में स्पष्ट लिखेंगे कि रैगिंग अवैध है और उसके परिणाम में छात्र के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। क्या-क्या आता है रैगिंग के दायर में सभी प्रेक्िटकल जोक, बेइज्जती, नाराज करना, डराना, डर पैदा करना, धमकी देना, मानसिक प्रताड़ना यौन प्रताड़ना, छात्रा की बेइज्जती, चोट पहुंचाना, किसी ऐसे काम को करने के लिए मजबूर करना जिससे मानवीय गरिमा प्रभावित होती हो, कमरे में बंद करना, आदि।

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