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निकली थी खेलने,मौत ने निगला

नाना-नानी के घर भविष्य संवारने आई 5 वर्षीय आरती के साथ तकदीर ने बुधवार को क्रूर खेल खेला। ननिहाल से वह खेलने के लिए निकली लेकिन कुछ ही फर्लाग आगे रास्ते में बिजली के टूटे तार की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बिहटा थाने के देवकुली गांव में इस दर्दनाक हादसे की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश व्याप्त था।ड्ढr ड्ढr वहीं परिजनों के रोने-चीखने की आवाज से माहौल गमगीन हो गया। आरती के पिता सत्येन्द्र वर्मा बिक्रम थाने के शिवपुर गांव के निवासी जबकि देवकुली निवासी उसके नाना कामेश्वर वर्मा किसान हैं। बच्ची के परिजनों व स्थानीय लोगों ने बताया कि कामेश्वर के घर के बगल में एक खंभे से लगा बिजली का नंगा तार टूट कर गिर गया था। इसी तार से होकर 440 वोल्ट विद्युत प्रवाहित होती थी। जैसे ही आरती टूटे तार की चपेट में आई तो उसे ज्यादा चीखने का मौका भी नहीं मिला। जब तक स्थानीय लोग बचाव के लिए कुछ करते तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटना की सूचना देने के बावजूद विद्युत विभाग के कोई भी कर्मचारी या अधिकारी घंटों बाद भी वहां नहीं पहुंचा। आखिरकार ग्रामीणों ने ही किसी तरह ट्रांसफर्मर से विद्युत आपूर्ति रोक कर बच्ची के शव को निकाला। घटनास्थल पर आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की लापरवाही की सजा बच्ची को मिली है। इसके लिए दोषी अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई और मासूम के परिजनों को मुआवजा देने की मांग लोगों ने की है। इधर बिहटा थाने के प्रभारी थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार ने घटना के बाबत कोई मामला दर्ज किये जाने से इनकार किया है। फिर उाागर हुई बिजली विभाग की लुंज-पुंज व्यवस्थाड्ढr पटना (का.सं.)। बिहटा में करंट लगने से एक बच्ची की मौत ने एक बार फिर बिजली आपूर्ति की लंज-पुंज व्यवस्था को उजागर कर दिया है। पिछले साल भी राजधानी में तार टूटने की घटना से दानापुर व खगौल में दो लोगों की मौत हो गयी थी। दीघा में एक निजी बिजली मिस्त्री की मरम्मत के दौरान करंट लगने से मौत हो गयी थी। इन घटनाओं के बावजूद जर्जर तारों को बदलने की गति धीमी है। शहर में अभी भी चालीस से पचास साल पुराने तारों के सहार बिजली की आपूर्ति हो रही है। कई इलाके ऐसे हैं जहां मेन रोड पर भी बिजली के तार खतरनाक तरीके से झूलते नजर आते हैं। एपीडीआरपी योजना के तहत पिछले दो सालों से राजधानी सहित सूबे के 12 जिलों में पुराने तारों को बदला जा रहा है। इसके बावजूद अभी भी ज्यादातर जगहों पर जर्जर तार हादसे को न्योता देते नजर आते हैं। कई जगहों पर प्लास्टिक व बांस-बल्लों के सहार झूलते तारों को खड़ा किया जाता है। हाल के दिनों में विकसित हुए मोहल्लों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। पोलों का अभाव है जिसे लोग बांसों के सहार तार खींचकर घरों तक ले जाते हैं। यही वजह है कि जरा भी बारिश व हवा चलती है कि दर्जनों स्थान पर 11 केवीए से 33 केवीए के तार टूट कर गिर जाते हैं। अशोक राजपथ, बीएन कालेज के पास, रमना रोड, महेन्द्रू, कंकड़बाग, अशोकनगर, बाईपास के मोहल्ले, रामकृष्णानगर, खगौल, खाजपुरा, गर्दनीबाग, कदमकुआं, राजेन्द्रनगर, सैदपुर, बहादुरपुर, संजयनगर, इंदिरानगर, करबिगहिया, मंदिरी आदि में हवा में झूलते तार आपको दिख जाएंगे।ड्ढr दूसरी ग्रामीण इलाकों में एपीडीआरपी योजना नहीं चलने से स्थिति और भी खराब है। इस बाबत बिजली बोर्ड के प्रवक्ता एसके घोष ने कहा कि तार बदलने का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। उनके मुताबिक इस तरह के हादसे होने पर बोर्ड की ओर मुआवजे का प्रावधान है।ं

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