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सरस मेले का चौथा दिन : बेमौसम बारिश ने डाला खलल

गांधी मैदान में चल रहे वसंत सरस मेले में बुधवार को बेमौसम की बारिश ने खलल डाल दिया। सभी स्टॉल पानी में भीग गए। पानी से सामानों को बचाना मुश्किल हो गया था। आयोजकों द्वारा पॉलीथिन का समुचित इंतजाम नहीं किया गया था। बाद में कुछ कुछ व्यवस्था हुई पर वे स्टॉलों के मुकाबले कम पड़े। करीब दो दर्जन से अधिक स्टॉल वालों ने पॉलीथिन के लिए आयोजकों को घेरा पर उन्हें समझा-बुझा कर भेज दिया गया। देर शाम में आयोजकों ने प्रतिभागियों को पॉलीथिन मुहैया कराया। उधर चार दिन बाद भी मेले में लगभग एक चौथाई स्टॉल खाली नजर आए। नुक्कड़ नाटक ‘खोजत भए अधेड़’ के शुरू होने से कुछ देर तक लोगों का मजमा जरूर लगा रहा। सांसद रामकृपाल यादव भी मौजूद थे। मेले में देर शाम केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी आए। उन्होंने स्टालों पर जाकर स्वयंसहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार सामानों को देखा।ड्ढr मेले में जहां कर्नाटक, मध्यप्रदेश, यूपी व तमिलनाडु के हस्तशिल्प के सामान लोगों को लुभा रहे हैं। वहीं भागलपुर के कतरनी चावल व चूड़ा की खुशबू भी पूरे मेले में फैल रही है। तगेपुर के महेन्द्र रजक व गोवर्धन मिश्रा ने बताया कि चूड़ा व चावल चालीस रुपए हैं। शिमोगा कर्नाटक के प्रतिभागी के स्टॉल पर स्फटिक व रूद्राक्ष का माला सजी है। गुरु बाशा के मुताबिक असली स्फटिक के माले साढ़े तीन से चार सौ रुपए तक के हैं। पेराम्बदुर(तमिलनाडु) की अंबिका के स्टॉल पर रामेश्वरम का शंख आकर्षित करता है।ड्ढr ड्ढr यहां शंख साढ़े चार सौ रुपए में बिक रहे हैं। ओरियालारो (तमिलनाडु) की कविता के स्टॉल पर मोती काी माला एक हजार रुपए में व स्फटिक की 250 से 400 रुपए में है। मंडला (मध्यप्रदेश)से आई पुष्पा श्रीवास्तव के स्टॉल पर खजूर के पत्ते से बने बैग व कारपेट झाड़ने वाला झाड़ू लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। नैनपुर, मंडला (मध्यप्रदेश) के ध्यान सिंहठाकुर के स्टॉल पर लोह के बने फैंसी आइटम नाव पंद्रह सौ रुपए में व म्यूजिकल आइटम तीन सौ रुपए में बिक रहा है। कानपुर के ओम साईं सेवा आश्रम के स्टाल परचंदन व उसका पाउडर लेने के लिए लोग जमा थे। कव्वाली व आल्हा ने झुमायाड्ढr पटना (का.सं.)। वसंत सरस मेले में बुधवार को कलाकारों द्वारा पेश नृत्य, गीत व कव्वाली का लोगों ने पूरा आनन्द उठाया। मेले के मुख्य मंच पर विकास बख्शी व मालाश्री राय ने कथक शैली में कृष्णा-राधा नृत्य पेश किया। सीपी झा व उनके साथियों ने कव्वाली से सबको झुमाया तो समूह लोकगीत से मंच पर ग्रामीण परिवेश उपस्थित हुआ। इसके पूर्व गनौरी सहनी ने आल्हा गायनसे सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की। संचालन राजीव रंजन श्रीवास्तवने किया।

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