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‘अब इ दही के की हेतई’

ाफी दिनों बाद अपने घर आने वाले अपने चिकित्सक पुत्र के लिए वृद्ध मां ने मिथिला की परंपरा के अनुसार दही जमाकर रखा था। मनोरांन गुरुवार को अपने गांव जाने वाले थे जहां उनके वृद्ध माता-पिता एक टूटे-फूटे व जर्जर मकान में रहते हैं। अपने माता-पिता के सुख के लिए ही तीन भाइयों में मंझले मनोरांन ने गांव में नया मकान बनाने का निर्णय लिया था। वहां पहुंचकर उन्हें नए मकान की नींव डालनी थी। इस शुभ मुहूर्त पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उनके गांव पर कई रिश्तेदार भी उनके गांव मोतीपुर (सुपौल) पहुंच चुके थे पर मनोरांन से पहले उनकी मौत की वहां पहुंची खबर ने सबों को हिला दिया।ड्ढr ड्ढr मां लक्ष्मी देवी उर्फ अल्लो का जहां रो-रोकर बुरा हाल था वहीं वह बार-बार कहे जा रही थीं- ‘अब इ दही के की हेतई।’ पुत्र के मौत की खबर पाकर निढाल पिता जनार्दन झा तो वहां से पटना के लिए रवाना हो गये पर नाते रिश्तेदार पर मानो गाज गिर गया। मृतक के ममेर भाई ज्योति कुमार झा ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि मनोरांन जब दरभंगा मेडिकल कॉलेज के छात्र थे तभी उनकी अपनी बैचमेट नीता सिन्हा से आखें चार हुईं। परिवार के विरोध के बावजूद आठ वर्ष पूर्व उन्होंने नीता से अंतराातीय विवाह कर लिया जिसे बाद में मनोरांन के परिानों ने स्वीकार भी कर लिया। मनोरांन के परिान सूत्र बताते हैं कि वह अपने माता-पिता से मिलने गांव जाया करते थे जहां अपने मकान की स्थिति देखकर उन्हें दर्द होता था। इस मकान के जीर्णोद्धार के लिए जब उन्होंने ठानी तो उनके फैसले के आड़े उनके परिवार का ही एक सदस्य आ गया। लवलू झा के अनुसार परिवार की वह महिला सदस्य गांव में मकान बनाने के पक्ष में नहीं थी।ड्ढr ड्ढr इस बात को लेकर दोनों में अक्सर तकरार हुआ करता था। इस मामले पर एसएसपी अमित कुमार ने कहा कि मामला तो पूर्ण रूप से आत्महत्या का ही है पर उसके पीछे कारण क्या हैं यह छानबीन के बाद ही स्पष्ट होगा।

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