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रोटी को मोहताज बोकाई के परिचान

ारबिसगंज के प्रथम विधायक स्व. बोकाई मंडल के परिान महा दो जून की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरं खा रहें हैं। महाविद्यालय के निर्माण के साथ-साथ नगर परिषद् अस्पताल समेत शैक्षिक एवं व्यवसायिक जगत में एतिहासिक भूमिका निभाने वाले इस महापुरुष की भावनाओं को स्थानीय नेताओं ने झूठाआश्वासन देकर महा छलने का कार्य किया। शहर स्थित स्व. मंडल का मकान खण्डहर में तब्दील हो गया है। शहर को बिजली युग में पहुंचाने वाले इस शख्सियत के घर बिजली नहीं है। एकमात्र बेटा बुद्धिनाथ मंडल पेट को लेकर मजदूरी करते-करते स्वर्ग सिधार गए।ड्ढr ड्ढr बचे परिान छोटे से चौक कोठी हाट पर दवाई बेचकर जीवनयापन कर रहे हैं। इस महापुरुष के चर्चा मात्र से परिान बिलख पड़ते हैं। परिानों ने बताया कि स्व. बोकाई मंडल द्वारा निर्मित कॉलेज के सैकड़ों छात्र आज आईएएस, आईपीएस, डाक्टर व इािंनियर हैं। क्षेत्र के हर बड़े नेताओं ने बोकाई मंडल के नाम से कभी कॉलेज का नामांकरण तो कभी प्रतिभा के स्थापना का झुठी घोषणा कर परिानों के अरमानों को छलने का काम किया है।

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  • Web Title: रोटी को मोहताज बोकाई के परिचान