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नक्सलियों को बेचते थे हथियार, दो सीआरपीएफ जवान गिरफ्तार

नक्सलियों को बेचते थे हथियार, दो सीआरपीएफ जवान गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने अवैध असलहों और कारतूसों के कथित कारोबार में लगे सीआरपीएफ के दो एवं पुलिस के तीन जवानों सहित छह लोगों को गिरफ्तार करके उनके पास से हजारों की संख्या में कारतूस, लगभग ढाई कुंतल उपयोग किए जा चुके कारतूस के खोखे और एके 47 तथा एसएलआर की 16 मैगजीनें बरामद की हैं।

प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) बृजलाल ने संवाददाताओं को बताया है कि दंतेवाड़ा कांड के बाद रामपुर से बड़ी संख्या में कारतूस इलाहाबाद के किसी व्यक्ति के जरिए असामाजिक तत्वों को आपूर्ति किए जाने की सूचना मिलने पर एसटीएफ ने मामले की जांच पड़ताल के बाद बीती रात एक सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक (शस्त्रागार), सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर के दो हवलदार और मुरादाबाद पुलिस अकादमी के एक कांस्टेबिल को गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक (शस्त्रागार) यशोदा नंदन सिंह, सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर के शस्त्रागार में तैनात हवलदार विनोद पासवान और विनेश सिंह तथा मुरादाबाद पुलिस अकादमी स्थित शस्त्रागार में तैनात कांस्टेबिल नाथी राम शामिल है।

बृजलाल ने बताया कि कल रात गिरफ्तार लोगों के पास और उनकी निशानदेही पर इन्सास रायफल के 1628, 38 बोर के 600 कारतूस, नौ मिमी0 पिस्तौल के 3085 कारतूस, एसएलआर के 144 और एके 47 के चार कारतूस तथा एके 47 के आठ, एसएलआर की छह तथा नाइन एमएम और इन्सास रायफल की एक एक मैगजीन के अलावा इनके लगभग 245 किलोग्राम उपयोग किए गए कारतूस के खोखे भी बरामद हुए हैं।

उन्होंने बताया कि चारों की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों के शस्त्रागारों में तैनात पुलिसकर्मियों के घरों पर छापे मारे और शुक्रवार को झांसी के मुख्य आरक्षी वंशलाल और अखिलेश पांडेय को भी गिरफ्तार कर लिया। इनके घरों से भी बड़ी संख्या में कारतूस और कारतूसों के खोखे बरामद हुए हैं।

बृजलाल ने बताया कि अब तक हुई जांच में पता चला है कि इलाहाबाद का रहने वाला सेवानिवृत्त उपपुलिस निरीक्षक यशोदा नंदन सिंह गिरोह का मुखिया है और वह रामपुर सीआरपीएफ सेंटर में तैनात विनोद पासवान और विनेश सिंह से कारतूस प्राप्त करके नाथी राम के साथ मिलकर उसे अन्य पक्षों तक पहुंचाता था।

उन्होंने बताया कि हालांकि वे गिरफ्तारियां दंतेवाड़ा कांड के बाद मिली सूचना के बाद संकलित खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई हैं, मगर जांच पूरी हुए बिना यह कहना संभव नहीं है कि अवैध कारतूसों की आपूर्ति नक्सली गिरोह को जा रही थी।

पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) ने कहा जितनी बड़ी संख्या में कारतूसों की बरामदगी हुई है, उससे यह तो साफ है कि उनकी आपूर्ति किसी बड़े गिरोह को की जाती होगी। वह नक्सली गिरोह भी हो सकता है। हमारा संदेह नक्सली गिरोहों पर है, मगर इस संबंध में जांच के बाद ही निश्चित रूप से कुछ कहा जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तार अभियुक्तों को पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे गहराई से पूछताछ की जायेगी। बृजलाल ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ में पता लगा है कि गोंडा में तैनात पीएसी की 30वीं वाहिनी, वाराणसी में पीएसी की 36वीं वाहिनी, कानपुर, इलाहाबाद, बस्ती, झांसी, पीटीसी मुरादाबाद, चंदौली, मिर्जापुर तथा सोनभद्र जिलों से जुड़े पुलिस कर्मी भी गिरोह के साथ सहयोग करते थे। इसके बाद उन जगहों पर सघन जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि पूछताछ एवं जांच में कुछ और पुलिसकर्मियों एवं अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं और उस संबंध में एसटीएफ की टीमें आगे की कार्रवाई में लगी है। बृजलाल ने बताया कि कारतूसों एवं खाली कारतूसों के क्रय विक्रय के प्रमुख स्थानों रामपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, लखनऊ तथा सीआरपीएफ के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिली भगत के बारे में विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई है एवं पुलिस तथा पीएसी कर्मचारियों की संलिप्तता के बारे में संबद्ध जिलों के अधीक्षकों के जरिए जांच कराई जा रही है।

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