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गोधरा कांड के आरोपियों से पोटा हटाना सही : कोर्ट

गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय आतंकवादी गतिविधि रोकथाम (पोटा) कानून समीक्षा समिति की उस सिफारिश को मान ली है जिसमें उसने गोधरा ट्रेन नरसंहार कांड के आरोपियों पर से पोटा हटाने की बात कही थी। न्यायमूर्ति भगवती प्रसाद और न्यायमूर्ति बंकिम मेहता की खंडपीठ ने गुरुवार को समिति की उस सिफारिश को सही ठहराया जिसमें उसने कहा था कि गोधरा के आरोपियों पर पोटा प्रावधान लागू नहीं किए जा सकते हैं क्योंकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ट्रेन में लगी आग संगठित आतंकी कृत्य था। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2002 में गोधरा स्टेशन पर साबरमती ट्रेन में आग लगने से कम से कम 5ारसेवक जिंदा दफन हो गए थे। ये कारसेवक अयोध्या से लौट रहे थे। इस घटना के बाद पूरे राय में भारी सांप्रदायिक दंगे हुए थे। पुलिस ने गोधरा ट्रेन अग्निकांड के सिलसिले में 103 लोगों को गिरफ्तार किया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जा सकेगा। उधर गोधरा कांड के पीड़ितों के वकील ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने के लिए समय मांगा है।

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  • Web Title: ‘गोधरा कांड के आरोपियों से पोटा हटाना सही’