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उद्योग जगत की मिली जुली प्रतिक्रिया

रेल मंत्री लालू यादव के अंतरिम रेल बजट पर विभिन्न व्यावसायिक संगठनों ने मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने रेल बजट प्रस्तावों को आम आदमी के लिए अनुकूल बताते हुए कहा कि उन्होंने सभी श्रेणी के किरायों में दो फीसदी की कटौती करके गरीब एवं मध्यम वर्ग को राहत दी है। इसके अलावा 43 नई रेलगाड़ियों के परिचालन से यात्रियों के आने-जाने तथा माल ढुलाई में और आसानी होगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह आर्थिक मंदी की मार झेल रहे अन्य क्षेत्रों के लिए सरकार ने राहत पैकेजों की घोषणा की है उसी तरह रेलवे को भी माल ढुलाई किरायों में कमी करनी चाहिए। फिक्की के नवनियुक्त अध्यक्ष हर्षपति सिंघांनिया ने इस अंतरिम रेल बजट को संतुलित करार देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2000 में 37,00 करोड़ रुपए के निवेश से रेलवे क्षेत्र को शीर्ष स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री ने आर्थिक मंदी को देखते माल ढुलाई किरायों में कोई खास रियायत नहीं दी। रेलवे को इस तरह की सब्सिडी पर विचार करने की जरूरत है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रेल बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि के कारण सड॥क से माल ढुलाई मंहगी होने के मद्देनजर व्यापारियों को उम्मीद थी कि रेलवे माला ढुलाई के संबंध में कोई अच्छा निर्णय लेगी लेकिन इस बजट में इस तरह का कोई संकेत नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो रेल मंत्री ने माल भाड़े में1प्रतिशत वृद्धि की बात स्वीकारी है वहीं दूसरी और माल भाड़े के ढांचे को ठीक करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। सीआईआई ने रेल बजट का स्वागत करते हुए कहा है कि श्री यादव ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए रेलवे के बुनियादी ढ़ांचे और माल ढुलाई कोरिडोर परियोजनाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि बजट में कोरिडोर कन्टेनर और यात्रियों की सुविधाओं के लिए जिन सुधारों की बात कही गई है उनसे भारतीय रेल नेटवर्क और मजबूत बनेगा।

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