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कोर्ट को सरकार की नीयत पर शक

आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह को यह जानना सुखद हो सकता है कि उनके कार्यकाल में की गई 22 हाार सिपाहियों की भर्ती रद्द करने के मामले में मायावती सरकार को सुप्रीम कोर्ट में काफी कठिन सवालों का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जांच रिपोर्ट को स्वीकार करने से पूर्व ही आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर दी गई? कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘हमें यह विच हंटिंग (खास अधिकारियों को निशाना बनाना) जसा लगता है। हम जांच करने के लिए डीाीपी को जारी सरकार का संदर्भ और उसके आधार पर की गई जांच रिपोर्ट देखता चाहते हैं।’ संदर्भ और रिपोर्ट पेश करने के लिए कोर्ट ने सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है। मामले की सुनवाई 27 को होगी। जस्टिस डीके जन और आरएम लोढ़ा की खंडपीठ उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही है। अब तक इस मामले में दो सुनवाई हो चुकी हैं लेकिन कोर्ट ने स्टे तो दूर अब तक इस मामले में नोटिस तक जारी नहीं किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा क्या डीाीपी को जांच बैठाने का अधिकार है? वही इस मामले में दूसरी जांच करवाने की क्या आवश्यकता थी? उप्र की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि दूसरी जांच भर्ती प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए की गई थी। क्या है घोटाला : मुलायम सिंह सरकार के समय यह भर्तियां 55 चयन बोर्डों द्वारा जनवरी 2005 से मई 2006 तक हुई थीं। मई 2007 में मायावती ने प्रदेश की कमान संभालने के बाद कुछ शिकायतों के आधार पर इन भर्तियों की जांच करवाई और उन्हें रद्द कर दिया। इसके खिलाफ कुछ उम्मीदवार हाईकोर्ट गए लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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