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वैज्ञानिकों ने ढूंढा प्यार का फेवीकोल

यार की शुरुआत कुछ ऐसे होती है.‘तू चंद्रमुखी मैं सूरा मुखी’ और अंत..‘तू मुझसे दुखी मैं तुझसे दुखी।’ प्यार अंधा होता है और नतीजा कई बार वही होता है जो फिाा और चांद का हुआ। पर अब वैज्ञानिकों ने आपको लंबे समय तक ‘अंधा’ बनाए रखने के इंतजाम बहुत हद तक कर लिए हैं। समाज में जिस तेजी से रिश्ते बन रहे हैं उसी तेजी से टूट भी रहे हैं। चांद और फिाा का उदाहरण आपके सामने है। फिाा की मोहब्बत में शादीशुदा चंद्रमोहन ने अपना धर्म बदला और चांद मोहम्मद बनकर शादी कर ली। अब दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। रिश्तों का इस तरह टूटना समाज के लिए चिंता का विषय है। वैज्ञानिक यह पता लगा चुके हैं कि क्यों किसी को प्रेम होता है और क्यों रिश्ते बाद में टूट जाते हैं? इसके लिए मस्तिष्क में सक्रिय कुछ न्यूरोकेमिकल्स और हार्मोन जिम्मेदार हैं। इन खोजों के बाद अब वैज्ञानिक प्रयोग इस बात पर हो रहे हैं कि क्या इन हार्मोन और केमिकल्स की कार्यप्रणाली में बाहरी हस्तक्षेप कर इन रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है? अभी तक जवाब हां में है, लेकिन इसका परीक्षण होना अभी बाकी है। जो भी हो, प्रेम संबंधों को लंबे समय तक चलाने का डॉक्टरी नुस्खा अब ज्यादा दूर नहीं है। अमेरिका की रुटजर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक हेलेन फिशर के ताजा शोध के अनुसार, प्रेम के रिश्तों को लंबे समय तक कायम रखने में वासोप्रेसीन हार्मोन का रोल है। यह हार्मोन किडनी में सक्रिय रहता है तथा सैक्स संबंधों के बाद रिलीज होता है। इसे एंटी यूरीन हार्मोन भी कहते हैं। महिला-पुरुष दोनों में पाया जाता है। यदि इसका उर्त्सजन बंद हो जाए तो प्रेम का रिश्ता टूट जाता है। वैज्ञानिकों ने जोड़े में रहने वाले पक्षियों पर एक प्रयोग आजमाया। मादा पक्षी को दवा देकर उसके वासोप्रेसीन हार्मोन खत्म किया। मादा पक्षी ने नर अपने पार्टनर की उपेक्षा शुरू कर दी और पाटर्नर दूसर पक्षी के साथ चला गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रेम करने वालों में इस हार्मोन की जांच कर पहले ही जाना जा सकता है रिश्ते चलेंगे या नहीं। दूसर, क्या कृत्रिम तरीके से यह हार्मोन शरीर में पहुंचाकर प्रेम के रिश्तों को टूटने से रोका जा सकता है?

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