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भर गई अलमारी

भर गई अलमारीड्ढr कांग्रेस में सीटों को लेकर संकट हो तो हो, चुनाव लड़ने वालों का कोई संकट नहीं है। टिकट के दावेदार प्रदेश अध्यक्ष के पास बायो-डाटा लेकर रो पहुंच रहे हैं। एक-एक संसदीय क्षेत्र से दस-दस उम्मीदवारों के बायो-डाटा। जब पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से यह पूछा गया कि अब तक कितने उम्मीदवारों ने अपना आवेदन किया है तो उन्होंने बताया कि सदाकत आश्रम में पूरी एक आलमारी बायो-डाटा से भर गई है। यह स्थिति तब है जबकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि पार्टी बिहार में कितने सीटों पर लड़ेगी। अब तो इतनी बड़ी संख्या में आए बायो-डाटा को दिल्ली पहुंचाने का भी संकट है।ड्ढr ड्ढr उम्मीदवारों का टोटाड्ढr समाजवाद की प्रवर्तक पार्टियों में एक तरफ उम्मीदवारी को लेकर मारामारी है वहीं साम्यवाद के रास्ते पर चलने वाली पार्टियों में 40 सीटों पर भी उम्मीदवार नहीं मिल रहे। काफी खोजबीन करने के बाद सूबे की तीनों वामपंथी पार्टियों को आठ जगह से चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय करना पड़ा है। एक तरफ सीपीआई प्रमुख पूर विश्व में वामपंथ का डंका बजने का दावा कर रहे हैं पर बिहार में वामपंथ का प्रभाव इस स्तर पर पहुंच गया है उम्मीदवारों का टोटा हो गया है। अगर वाम मोर्चा अस्तित्व में नहीं आता तो खींचतान कर एक तिहाई सीट पर ही सीपीआई और सीपीएम को चुनाव लड़ना पड़ता।ड्ढr ड्ढr सुस्त पड़े मंत्री पद के दावेदारड्ढr निगरानी मामले के कारण परिवहन मंत्री रामानंद सिंह के इस्तीफे के बाद उनकी कुर्सी पर कई लोगों की नजर गड़ी थी। मंत्रिमंडल विस्तार में पद खो चुके कई पूर्व मंत्रियों ने भी कुर्सी के लिए लंबी दौड़ लगाई। एक अणे मार्ग से दिल्ली तक हो आए। कई को ‘आश्वासन’ का भ्रम भी हो गया। यहां तक कि जदयू के राजगीर शिविर तक चेहरा और परफार्मेस दिखाने की होड़ लगी थी। श्री सिंह के आरोपमुक्त होने के बाद जैसे ही मुख्यमंत्री ने फिर से उन्हीं को कुर्सी सौंपने का एलान किया, कई की जमीन खिसक गई। अब ऐसे लोग पुन: सुस्त हो गए हैं।ड्ढr प्रस्तुति : कमलेश इन्द्रभूषण आलोक चंद्रं

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  • Web Title: बाकी सब बकवास