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फिल्मी सितारे भी साध रहे ग्रह-नक्षत्र

चुनावी महासमर की तैयारी के लिए कई सितार भी अपने-अपने ग्रह-नक्षत्र साधने में जुट गए हैं। हालत यह है कि कल तक जो फिल्मी बाबू इस तरफ थे वह मौका देखकर ‘उधर’ चले गए हैं और जो उस तरफ थे वह हवा का रुख भांपते हुए ‘इधर’ आने की तैयारी में हैं। फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा गृह भूमि पटना को चुनावी रणभूमि बनाने में लगे हैं। इसके लिए अब वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते नहीं अघाते। दूसरी तरफ जाने-माने निर्देशक प्रकाश झा अपने पुराने मित्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के बावजूद बेतिया से ही दुबारा चुनाव लड़ने पर अड़े हैं।ड्ढr ड्ढr उधर बिहार के छोरा मनोज तिवारी राजनीति में आने के लिए सूबे का बार्डर लांघकर उत्तर प्रदेश पहुंच गए हैं। अभिनेताओं की चुनावी पैंतरबाजी पर मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेयी की भी नजर है। उनका कहना है कि सामाजिक सरोकार रखने वाले अभिनेताओं का राजनीति में आना शुभसंकेत है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा पटनासाहिब सीट पर बतौर भाजपा उम्मीदवार दावेदारी जता रहे हैं। उनके रणनीतिकार जानते हैं कि इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी साधना जरूरी है। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले नाराज हुए बिहारी बाबू ने राजग के लिए प्रचार नहीं किया। फिर भी सरकार बन गई तो उन्होंेने राज्य में फिल्मसिटी बनाने का प्रस्ताव दिया। सरकार ने इसे भाव नहीं दिया तो श्री सिन्हा की भृकुटि फिर तनी। लेकिन हाल के दिनों में वह नीतीश सरकार के प्रति काफी ‘सॉफ्ट-सॉफ्ट’ हैं। जहां-तहां सभाओं में वह सरकार के काम और विकास की तारीफ करते नहीं अघाते। कारण सब जानते हैं। जान-माने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा का नाम पहले बेतिया से राजग उम्मीदवार के रूप में चल रहा था। मगर भाजपा यह सीट किसी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है।ड्ढr ड्ढr इस बीच लगता है जद यू आलाकमान से भी श्री झा को ‘संकेत’ मिल गया है। अब उनका कहना है कि निर्दलीय ही सही पर चुनाव तो वह जरूर लड़ेंगे। वैसे अन्य पार्टियों से भी बातचीत चल रही है। उनका कहना है कि नीतीश कुमार से मोहभंग जैसी कोई बात नहीं है। उनसे व्यक्ितगत संबंध और मित्रता है और इस पर आंच नहीं आएगी। अलबत्ता पार्टी और चुनाव के मुद्दे अलग तरह के होते हैं। अपनी फिल्मों की बदौलत भोजपुरी पट्टी में धूम मचाने वाले बिहार के छोरा मनोज तिवारी राज्य की सीमा पारकर गोरखपुर से चुनावी अखाड़े में उतरने वाले हैं। श्री तिवारी ने बताया कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और महासचिव अमर सिंह ने जब उम्मीदवार बनने की पेशकश की तो वह ठुकरा नहीं सके। क्या बिहार से लड़ने के लिए किसी दल का ऑफर नहीं मिला, के जवाब में श्री तिवारी कहते हैं कि यूपी-बिहार को वह अलग-अलग नजर से नहीं देखते। आखिर दोनों का इलाका तो वही भोजपुरी वाला है। वहीं श्री वाजपेयी का कहना है कि एक अपराधी से लाख गुना बेहतर है कि एक अभिनेता राजनीति में आए। अभिनेता जनता से जुड़ा होता है और वह उनकी नब्ज भी पहचानता है। चूंकि वे नाम शोहरत पहले ही कमा चुके होते हैं इसलिए ये कुर्सी से चिपकते भी नहीं। ऐसे कई उदाहरण हैं जब नहीं चल पाने पर एक्टरों ने राजनीति को अलविदा कह दिया है। श्री वाजपेयी अभी प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेशकश तो उनको भी कम नहीं मिली लेकिन उनको एक्िटव पॉलिटिक्स में आने में फिलहाल कोई दिलचस्पी नहीं है।

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