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हाईकोर्ट में जज-वकील भिड़े

पटना हाईकोर्ट के एक वकील को अपशब्द कहे जाने और अवमानना का मामला चलाकर पुलिस हिरासत में लिए जाने की सूचना के बाद जमकर नारबाजी हुई। जज न्यायमूर्ति धरणीधर झा द्वारा अपना आदेश वापस लिए जाने के बाद देर शाम मामला शांत हो गया। समन्वय समिति ने दोपहर में न्यायमूर्ति श्री झा के कोर्ट बहिष्कार का जो निर्णय लिया था उसे समझौते के बाद शाम क ो वापस ले लिया गया।ड्ढr ड्ढr शुक्रवार को हंगामेदार स्थिति के कारण दोपहर बाद न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रमौलि कुमार प्रसाद ने पहल करते हुए वकीलोंे के बीच जाकर स्वयं बात की। उन्होंने शाम साढ़े चार बजे तक का समय मांगा।उधर तीनों अधिवक्ता संघों की आपात बैठक हुई जिसमें वरीय अधिवक्ता राणा प्रताप सिंह, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, योगेशचन्द्र वर्मा, संदीप शाही सहित अनेक वकील शामिल हुए। बैठक में वकील लव-कुश को बुलाया गया। उसने न्यायमूर्ति श्री झा के साथ हुई नोक-झोंक का लिखित ब्यौरा दिया। उसपर विचार करने के बाद समन्वय समिति ने मामले का सम्मानजनक हल निकालने तक न्यायमूर्ति श्री झा के कोर्ट का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। साथ ही सभी वकीलों से कहा गया कि वे ऐसा कुछ नहीं करं जिससे न्यायालय की गरिमा धूमिल हो।ड्ढr ड्ढr इधर बैठक चल रही थी तभी वकीलों के एक गुट ने जमकर नारबाजी शुरू कर दी जिसके कारण दोपहर दो बजे के बाद सभी जज क्षलास छोड़कर चले गए। बाद में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के साथ अन्य जजों की बैठक हुई और उसके पश्चात समन्वय समिति के साथ।ड्ढr कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के कक्ष से बाहर आने के बाद एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता श्यामा प्रसाद मुखर्जी, महासचिव योगेश चन्द्र वर्मा तथा लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि मामले को रफा-दफा कर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्री झा ने वकील लवकुश के खिलाफ जो आदेश पारित किया था उसे उन्होंने वापस ले लिया है। इसलिए सोमवार से पहले की तरह कोर्ट की कार्यवाही चलेगी। न्यायमूर्ति श्री झा के कोर्ट बहिष्कार का निर्णय भी समिति द्वारा वापस लिए जाने की जानकारी दी गई।ड्ढr ड्ढr दरअसल साढ़े ग्यारह बजे जब न्यायमूर्ति श्री झा जमानत संबंधी मामलों की सुनवाई कर रहे थे तो वकील लवकुश के साथ उनकी नोक-झोंक हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि जज साहब ने वकील पर अवमानना का मामला शुरू करते हुए पुलिस तक को बुला लिया। इस बात की जानकारी मिलते ही हाईकोर्ट के वकीलों में खलबली मच गई। जज साहब के व्यवहार से खफा वकीलों ने नारबाजी शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद मामला इतना गंभीर हो गया कि कई जज समय से पहले ही क्षलास छोड़कर जाने को विवश हो गए।

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