अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आयोग की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं : एनडीए

एनडीए ने चुनाव आयोग की टीम द्वारा सूबे की छह संसदीय सीटों महाराजगंज, सारण, मुंगेर, जमुई, जहानाबाद एवं औरंगाबाद के चुनाव की जांच पर कड़ी आपत्ति प्रगट की है। जदयू और भाजपा ने आयोग से जांच का आधार जानना चाहा है और आंदोलन की धमकी भी दी है। उसने आरोप लगाया कि यह सब राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के इशार पर किया गया है और बिहार में अपनी जमीन गंवाने के बाद अब वे फिर से केन्द्र को ब्लैकमेल कर रहे हैं। कैबिनेट की बैठक में उनका नहीं जाना यही दर्शाता है।ड्ढr ड्ढr शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह ने कहा कि पूर मामले में आयोग की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं है और जांच का आधार भी अज्ञात है। चारों चरण के चुनाव होने और पुनर्मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अचानक ऐसी कौन सी बात हो गई जो जांच की जरूरत पड़ गई।ड्ढr उधर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने निर्वाचन आयोग पर केन्द्र की यूपीए सरकार के बड़े नेताओं के इशार पर काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे समय में जब एनडीए भारी जीत की ओर बढ़ रहा है उसका यह कदम किसी खास राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए है। राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों को पूर्व सूचना दिए बिना टपक जाना उसकी पारदर्शिता पर संदेह पैदा करता है। वह भी तब जबकि आयोग के आब्जर्वर और माइक्रो आब्जर्वरों ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। एक ओर अरुणाचल का मुक्तो क्षेत्र है जहां सौ फीसदी से भी अधिक मतदान को रिजेक्ट नहीं किया गया मगर शांतिपूर्ण तरीके से हुए बिहार के चुनाव की जांच हो रही है। इस मुद्दे पर भाजपा का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को दिल्ली में आयोग से मिलेगा। ड्ढr भाजपा में चल रहा जोड़-घटावड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। चुनावी महापर्व का गुबार थमने पर अब जोड़-घटाव का गणित चल रहा है। किसने किसको कितने की चपत लगाई? पटनासाहिब लोकसभा सीट शुरू से भाजपा की वीआईपी सीट मानी जा रही थी। प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं के विरोध के बावजूद जब शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट मिला तभी से उनको शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी का खास कैंडिडेट माना जा रहा था। फैसिलिटी भी उसी लिहाज से मुकर्रर हुई थी। प्रदेश नेतृत्व को स्पष्ट निर्देश था-कहीं कोई कोताही नहीं होनी चाहिए-न संसाधन की, न मैनपावर की। मगर ऐन मतदान के दिन जो बदइंतजामी और अफरा-तफरी के शिकार भाजपा के वोटर और बूथों पर तैनात कार्यकर्ता हुए वह पार्टी नेताओं को अंदर तक हिलाए हुए है। प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह और अभियान समिति के डा. सीपी ठाकुर ने तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जिम्मेदारी मुख्य रूप से तीनों विधायकों को सौंपी गई थी। वही जानें। मगर जो रिपोर्ट छनकर आ रही है उसके मुताबिक पटनासिटी तो ठीक-ठाक रहा। सबसे अधिक परशानी कुम्हरार और दीघा विधानसभा क्षेत्र में हुई। यहां की जिम्मेदारी नितिन नवीन और अरुण कुमार सिन्हा को दी गई थी।ड्ढr ड्ढr प्रबंधन के लिहाज से फतुहा की स्थिति भी ठीक नहीं बताई गई। यहां की जिम्मेदारी हरन्द्र सिंह के हवाले थी। इसके साथ ही ओवरआल जिम्मेदारी रणवीर नन्दन और विश्वनाथ भगत को सौंपी गई थी। श्री नन्दन तो इस लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी ही थे। अब तक जो रिपोर्ट इस लोकसभा क्षेत्र के राजेन्द्रनगर स्थित भाजपा के मुख्य चुनाव कार्यालय को पहुंची है उस पर गौर करं तो अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात श्री सिन्हा के कई लेफ्टिनेंट पूरी तरह सीन से ही गायब रहे। घर पर फोन लगाने पर कहा जाता था कि बाहर हैं। मगर बाहर वे कहीं दिखे नहीं। वहीं कई सिपहसालारों के मोबाइल फोन भी ऑफ थे। भारी गर्मी में कार्यकर्ताओं को झुलसने के लिए छोड़कर नेता नींद मार रहे थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आयोग की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं : एनडीए