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फरियादी जाएं तो जाएं कहां

दूर-दराज के गांवों से पटना पहुंचकर जनता दरबार में अपनी समस्या रखने वाले फरियादी अभी भी परशान हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो उनकी बात सुन ली लेकिन विभाग नहीं सुन रहे। जनता दरबार में लोगों ने मुख्यमंत्री के हाथों में 36 हजार शिकायतें पकड़ाईं लेकिन 46 विभागों व कार्यालयों ने इनमें 1हजार को ही निबटाया। नतीजा इधर-उधर चक्कर काट रहे लगभग आधे फरियादी अब समझ नहीं पा रहे कि आखिर जाएं तो कहां जाएं?ड्ढr ड्ढr जनता दरबार में पुलिस पर अपराधियों का पक्ष लेने, एफआईआर दर्ज न करने, जमीन के झगड़े, इंदिरा आवास, लाल कार्ड और अनाज वितरण में गड़बड़ी, शिक्षक और आंगनबाड़ी सेविकाओं की बहाली में गड़बड़ी की ही शिकायतें आती हैं। कायदे से इनका समाधान थाना, बीडीओ, एसडीओ और डीएम कार्यालय में हो जाना था लेकिन लोगों को मुख्यमंत्री के पास आना पड़ता है।ड्ढr मुख्यमंत्री चाहते हैं कि सूचना के अधिकार की तरह ही जनता दरबार भी प्रशासन पर नजर रखने के लिए आम आदमी का सशक्त हथियार बने। पर लगता है, यह मैसेज अभी वे ही लोग नहीं समझ पाए हैं जिन पर विकास की असली जिम्मेदारी है।ड्ढr ड्ढr मुख्य सचिव आर.जे.एम.पिल्लै ने विभागीय सचिवों के साथ जन शिकायतों पर कार्रवाई की समीक्षा की तो पूरा हाल सामने आया। मुख्यमंत्री सचिवालय ने जनता दरबार में आयी 36842 शिकायतों को 46 विभागों को सौंपा। अब तक उनमें से 1पर ही कार्रवाई हुई जबकि 15080 शिकायतों को निबटाने की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर 1766 आवेदनों के बार में तो कोई सूचना नहीं है। सबसे खराब स्थिति यह है कि जन शिकायतों का दो-तिहाई हिस्सा नौ विभागों से जुड़ा है फिर भी वहां मात्र 11805 पर ही कार्रवाई हुई।

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